Akola News: महाराष्ट्र के मुंबई, कोकण, पश्चिम महाराष्ट्र, विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र की ऑटोरिक्शा संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक 15 मार्च 2026 को मुंबई के गिरगांव में आयोजित हुई. इस बैठक में रिक्शा चालकों के हितों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई. संयुक्त कृति समिति महाराष्ट्र ने स्पष्ट किया कि ऑटोरिक्शा चालकों के लिए स्वतंत्र कल्याणकारी मंडल की स्थापना आवश्यक है.
परंतु सरकार ने बिना किसी चर्चा के एकतरफा निर्णय लेते हुए रिक्शा चालकों से मंडल में पंजीयन के लिए 500 रुपये प्रवेश शुल्क और 300 रुपये वार्षिक शुल्क अनिवार्य कर दिया है. इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए संगठनों ने विरोध जताया. बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि कई आरटीओ कार्यालयों में रिक्शा चालकों पर जबरदस्ती पंजीयन का दबाव बनाया जा रहा है.
पंजीयन न करने पर परमिट नूतनीकरण और पासिंग जैसी सेवाएँ रोकने की धमकी दी जा रही है. इसे गैरकानूनी करार देते हुए बैठक में तीव्र निषेध व्यक्त किया गया. संगठनों ने सरकार की दुटप्पी नीति की भी आलोचना की. सरकार ने ऑटोरिक्शा लाइसेंस वितरण पर स्थगिती लगाई है, लेकिन इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा और ईरिक्शा पर कोई रोक नहीं लगाई गई है.
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं रिक्शा चालकों से 500 रुपये प्रवेश शुल्क और 300 रुपये वार्षिक शुल्क लेने का निर्णय तुरंत रद्द किया जाए. आरटीओ कार्यालयों में जबरदस्ती की जा रही पंजीयन प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए. इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा और ईरिक्शा की पंजीयन पर भी स्थगिती लगाई जाए. इन मांगों का निवेदन 23 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले के आरटीओ कार्यालय में संयुक्त कृति समिति महाराष्ट्र की संलग्न संगठनों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा.