काटेपूर्णा अभयारण्य में ली गई वन पर्यटक कार्यशाला, पर्यटकों को अभयारण्य में जैवविविधता की दी जाती जानकारी
काटेपूर्णा अभयारण्य में 17 और 18 अप्रैल 2026 को वन पर्यटक मार्गदर्शक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जैवविविधता और रोजगार के अवसरों पर चर्चा की गई।
Washim and Akola Districts: वाशिम व अकोला जिले में फैले काटेपूर्णा अभयारण्य में बढ़ते पर्यटकों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अकोला वन्यजीव विभाग की ओर से 17 और 18 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय वन पर्यटक मार्गदर्शक कार्यशाला आयोजित की गई. प्राकृतिक शिक्षा का बेहतरीन केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले इस अभयारण्य में स्कूल और महाविद्यालयों द्वारा नियमित रूप से अध्ययन सहल आयोजित की जाती है. इसी पृष्ठभूमि पर पर्यटकों को अभयारण्य में जैवविविधता की सही जानकारी मिले और स्थानीय युवकों को मार्गदर्शक बनाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, इस उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया.
इस कार्यशाला में मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प सलाहकार समिति के सदस्य अमोल सावंत ने गाइड की भूमिका और जिम्मेदारियों पर मार्गदर्शन किया. ओपनविंग्ज फाउंडेशन, अकोला के संचालक और लाइफ स्किल ट्रेनर डॉ. प्रदीप अवचार ने विविध उपक्रमों द्वारा मार्गदर्शकों की क्षमता विकास पर जानकारी दी. पक्षी अभ्यासक विलास देशमुख ने पक्षी जीवन पर जानकारी दी, जबकि गुलाबनबी आज़ाद महाविद्यालय, बार्शीटाकली के सहप्राध्यापक डॉ. संतोष सुरडकर ने वृक्ष संपदा पर स्लाइड शो प्रस्तुत किया. निवृत्त वनरक्षक श्रीराम कुरवाडे ने प्राकृतिक ट्रेल द्वारा पेड़ों की पहचान और उनके आयुर्वेदिक महत्व पर जानकारी दी.
संदीप सरडे ने मार्गदर्शन किया और वनरक्षक अमोल पोटे ने वन पर्यटन से जुड़े कानूनों की जानकारी दी. विकसित की जा रही वन पर्यटन सुविधावनपरिक्षेत्र अधिकारी अमित शिंदे ने कहा कि अभयारण्य में वन और वन्यजीव संरक्षण के साथ ही वन पर्यटन सुविधा विकसित करने का प्रयास शुरू है. पर्यटकों में वन्यजीव संवर्धन की जागरूकता करना और स्थानीय युवकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना इस उपक्रम का मुख्य उद्देश्य है. यह कार्यशाला विभागीय वनाधिकारी यशवंत नागुलवार और सहायक वनसंरक्षक चेतन राठोड के मार्गदर्शन में आयोजित की गई. कार्यक्रम की सफलता के लिए वनरक्षक प्रवीण कांबले, प्रथम सिंकटवार, मंगेश पांडे और अजय डाकोरे ने विशेष परिश्रम किए. कैप्शन शेलुबाजार. कार्यशाला.
