अकोला में जल संकट की आहट, काटेपूर्णा बांध में सिर्फ 18% पानी बचा; सातवें दिन हो रही जलापूर्ति
Akola Water Shortage: अकोला में बारिश की कमी के चलते जल संकट गहराता जा रहा है। काटेपूर्णा बांध में सिर्फ 18 प्रतिशत पानी शेष है और शहर में सातवें दिन जलापूर्ति की जा रही है।
- Written By: आंचल लोखंडे
अकोला जल संकट (सोर्सः सोशल मीडिया)
Akola Municipal Corporation: अकोला शहर तथा जिले में पिछले कई दिनों से बारिश का दूर दूर तक पता नहीं है, जिसके कारण आनेवाले गंभीर जल संकट की स्थिति की आहट सुनाई दे रही है। महान गांव में स्थित काटेपूर्णा बांध से शहर के लोगों को जलापूर्ति की जाती है। वर्तमान समय में काटेपूर्णा बांध में सिर्फ 18।0 प्रश पानी बकाया है। इसी कारण से अब शहर में सातवें दिन नलों द्वारा जलापूर्ति की जा रही है।
विशेष बात यह है कि, आधा जुलाई माह समाप्त हो गया है और अब तक जैसी दमदार बारिश होनी चाहिए थी नहीं हुई है। लगातार बाष्पीकरण के कारण जल प्रकल्पों में दिन प्रतिदिन पानी घटता जा रहा है। अब इस समय अकोला शहर में सातवें दिन नलों द्वारा जलापूर्ति की जा रही है। इसी तरह वान प्रकल्प में 41.61 प्रश जल भंडारण है। इसी तरह मोर्ना प्रकल्प में 44.95 प्रश, निर्गुणा प्रकल्प में 18.61 प्रश, उमा प्रकल्प में 2.93 प्रश, दगड़पारवा प्रकल्प में 42.68 प्रश पानी शेष है।
24 में से 12 जलप्रकल्प सूख गए
आए दिन जल प्रकल्पों में पानी कम होता जा रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में कुल 24 लघु प्रकल्प हैं, जिसमें से 12 प्रकल्प पूरी तरह से सूख गए हैं। बचे हुए 12 प्रकल्पों में बहुत ही कम पानी शेष है। यह सही है कि भीषण गर्मी में थोड़ी कमी आई है लेकिन उमस काफी बढ़ गयी है। अकोला शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाले महान गांव स्थित काटेपूर्णा बांध में जल भंडारण लगातार घट रहा है।
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काटेपूर्णा बांध में घटा जलस्तर
जल उपलब्धता कम होने के कारण अकोला मनपा को जल वितरण में कटौती करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि शहर में सातवें दिन नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
भर कर रखना पड़ता है पानी
यह उल्लेखनीय है कि, अब सात दिनों में एक बार नलों द्वारा जलापूर्ति होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक कठिनाई उन परिवारों को हो रही है जो पूरी तरह मनपा की जलापूर्ति पर निर्भर हैं।
अकोला में अब हर सातवें दिन मिल रहा पानी
ऐसे लोगों को सात दिनों के लिए पेयजल और घरेलू उपयोग का पानी एक साथ संग्रहित करना पड़ता है। घरों में सीमित स्थान होने के कारण कई परिवारों को पानी के भंडारण में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि जिस दिन नलों से पानी आता है, उस दिन उन्हें अपने अन्य कार्य छोड़कर पानी भरने में समय लगाना पड़ता है। हालांकि कुछ परिवारों के पास बोरवेल, हैंडपंप या इलेट्रिक पंप जैसे वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन केवल नल जलापूर्ति पर निर्भर लोगों की स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है।
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जरूरत पडने पर टैंकरों द्वारा होगी जलापूर्ति
इस बारे में मनपा प्रशासन का कहना है कि, शहर के किसी भी क्षेत्र में पानी की समस्या उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो महानगरपालिका प्रशासन द्वारा टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी। मनपा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि, संभाल कर पानी का उपयोग करें, मनपा प्रशासन निश्चित ही पानी समस्या उत्पन्न होने से पहले ही टैंकरों द्वारा जलापूर्ति शुरू करेगा, इसलिए शहरवासी चिंता न करें।
