हर घर नल, फिर भी पानी को तरसे गांव, अकोला के 40 गांवों में संकट की आहट, अभियान पर उठे सवाल!
अकोला में गर्मी से पहले संभावित जलसंकट को लेकर डीएम को संशोधित कार्य योजना भेजी गई है। कई तहसीलों में नल होने के बावजूद पानी नहीं, 60 से अधिक गांवों में खारे पानी से स्वास्थ्य संकट
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Akola Water Crisis: गर्मी के मौसम में पानी की कमी से निपटने के लिए जिला प्रशासन की ओर से संभावित पानी संकट की संशोधित कार्य योजना पिछले सप्ताह जिलाधिकारी वर्षा मीणा के पास मंजूरी हेतु प्रस्तुत की गई है। सामान्यतः जिले में पानी की कमी मार्च के बाद महसूस होने लगती है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नागरिक पीने के पानी के लिए भटकते दिखाई देते हैं। जिले में मुख्य रूप से बार्शीटाकली, बालापुर, तेल्हारा और अकोट तहसील में पीने के पानी की समस्या गंभीर रूप से सामने आती है। पिछले वर्ष भी प्रशासन ने पहले से ही योजना बनाकर काम किया था, जिसके कारण नागरिकों को पानी की कमी से ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
हर घर नल योजना पर सवाल
जिले में जलजीवन मिशन के अंतर्गत ‘हर घर नल से जल’ अभियान चलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन दिए जा रहे हैं। लेकिन कई स्थानों पर तकनीकी खामियों के कारण पानी की कमी बनी हुई है। बालापुर तहसील के 60 से अधिक गांवों में खारे पानी की समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन तो पूरे हो गए हैं, लेकिन कई जगहों पर पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है।
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जिले में औसत से अधिक वर्षा दर्ज
जिले में वर्ष 2025 के मानसून सत्र (विशेषकर जून) में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई। जून में जहां सामान्यतः 136।9 मिमी वर्षा होती है, वहीं इस बार 155.8 मिमी वर्षा हुई। मई 2025 में भी 82 से 132 वर्षों में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ।
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रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी
- जिले में भीषण पानी संकट के बावजूद सरकारी कार्यालयों और प्रशासन की ओर से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की भारी अनदेखी की जा रही है।
- कई इमारतों पर लगी व्यवस्थाएं बंद पड़ी हैं और लाखों रुपये का निधि बेकार पड़ा है।
- वर्तमान स्थिति में जिले के कुछ गांवों में पीने के पानी की तीव्र कमी है और नागरिकों को खारा पानी पीने की मजबूरी है।
- सरकारी कार्यालयों में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रकल्प पाइप टूटने या रखरखाव की कमी के कारण निर्षक्रय हो गए हैं।
अधिकारी का दावा
ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता अतुल सालुंके ने बताया कि संभावित जलसंकट की कार्य योजना मंजूरी के लिए भेजी गई है। औसत से अधिक वर्षा के चलते इस वर्ष जिले में गंभीर पेयजल संकट नहीं होने देने के लिए विभाग पूरी तरह प्रयासरत रहेगा।
