अकोला के वीर सपूत प्रवीण जंजाल को मरणोपरांत कीर्ति चक्र, राष्ट्रपति ने पत्नी और माता को सौंपा सम्मान
Soldier Pravin Janjal Kirti Chakra: अकोला के शहीद जवान प्रवीण जंजाल को मरणोपरांत 'कीर्ति चक्र' मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी पत्नी और माता को यह प्रतिष्ठित पदक सौंपकर सम्मानित किया।
- Written By: केतकी मोडक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रवीण जंजाल के परिवार को राष्ट्रपति भवन में कीर्ति चक्र देते हुए (सोर्स - फोटो नवभारत)
President Honor Akola Soldier Family: अकोला जिले का सीना गर्व से एक बार फिर चौड़ा हो गया है, हालांकि इस गौरव के पीछे एक वीर का सर्वोच्च बलिदान भी शामिल है। जिले के मोरगांव भाकरे के मूल निवासी और महार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन के जांबाज जवान प्रवीण जंजाल को कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के खिलाफ अदम्य साहस, अद्वितीय वीरता और देश के लिए प्राण न्यौछावर करने के लिए मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया है।
देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक बेहद गरिमामयी और विशेष रक्षा अलंकरण समारोह में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्रदान किया। शहीद वीर जवान प्रवीण जंजाल की ओर से उनकी धर्मपत्नी श्यामबाला जंजाल और पूज्य माता शाहू जंजाल ने अत्यंत भावुक क्षणों के बीच राष्ट्रपति के हाथों इस प्रतिष्ठित सम्मान को ग्रहण किया।
इस ऐतिहासिक और गौरवशाली समारोह के साक्षी उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश के कई दिग्गज केंद्रीय मंत्री, भारतीय सेना के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य अतिथि बने।
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6 जुलाई 2024 का वो खौफनाक दिन
देश सेवा के जज्बे से लबरेज प्रवीण जंजाल 6 जुलाई 2024 को कश्मीर घाटी के एक बेहद अशांत और दुर्गम इलाके में आतंकवाद विरोधी सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। ऑपरेशन के दौरान प्रवीण अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण मोर्चे पर तैनात थे। इसी बीच उनकी पारखी नजरों को घाटी की झाड़ियों में कुछ संदिग्ध और असामान्य गतिविधियां दिखाई दीं।
खतरे की आहट पाते ही उन्होंने एक पल की भी देरी किए बिना तत्परता दिखाते हुए अपने अन्य साथी जवानों को अलर्ट कर दिया। खुद को चारों तरफ से घिरता देख और भागने का कोई रास्ता न पाकर, वहां छिपे हुए आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध और कायरतापूर्ण गोलीबारी शुरू कर दी।
सिर में लगी गोली
परिस्थितियां पूरी तरह विपरीत थीं और चारों तरफ से गोलियां बरस रही थीं, लेकिन प्रवीण जंजाल के कदम पीछे नहीं हटे। उन्होंने अद्वितीय सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देते हुए आगे बढ़कर आतंकियों का पीछा किया। अपनी सटीक पोजिशनिंग और अचूक निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने मोर्चे पर डटकर मुकाबला किया और दो बेहद कुख्यात व वांछित आतंकवादियों को मौके पर ही मार गिराया।
इस भीषण आमने-सामने की मुठभेड़ के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण गोली वीर प्रवीण के सिर में जा लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और खून से लथपथ हो गए। इस जानलेवा चोट के बावजूद, उन्होंने अंतिम क्षण तक अपनी बंदूक नहीं छोड़ी और रेंगते हुए संघर्ष जारी रखा। आखिरकार, मातृभूमि की रक्षा का अपना फर्ज निभाते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
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पूरे महाराष्ट्र और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बना सर्वोच्च बलिदान
देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए दिए गए उनके इस अद्वितीय और सर्वोच्च बलिदान, अटूट कर्तव्यनिष्ठा और असाधारण शौर्य को सलाम करते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा है। जब राष्ट्रपति भवन में शहीद प्रवीण जंजाल के पराक्रम की गाथा पढ़ी जा रही थी, तो वहां उपस्थित हर आंख नम हो गई।
अकोला के मोरगांव भाकरे से निकलकर देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले इस जांबाज की गौरवपूर्ण उपलब्धि ने आज न केवल अकोला जिले, बल्कि पूरे महाराष्ट्र और देश को गौरवान्वित किया है। शहीद प्रवीण जंजाल की यह अमर शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा देशभक्ति और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनी रहेगी।
