अकोला: शिवर तालाब सौंदर्यीकरण का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ ठप; 2.84 करोड़ की योजना अधर में, बारिश से पहले हादसों का डर
Akola Municipal Corporation News: केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत अकोला के शिवर तालाब के पुनरुज्जीवन का कार्य पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है।
Akola Amrut Yojana News: अकोला प्रभाग क्रमांक 13 अंतर्गत शिवर क्षेत्र में केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत शुरू किया गया तालाब पुनरुज्जीवन प्रकल्प फिलहाल ठप पड़ा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में तीव्र नाराज़गी व्यक्त की जा रही है।
लगभग 2 करोड़ 84 लाख रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2025 में विधायक रणधीर सावरकर के हाथों किया गया था। शिवर तालाब पुनरुज्जीवन परियोजना का ठप पड़ना नागरिकों के लिए चिंता का विषय है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह तात्कालिक कदम उठाकर इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बरसात से पहले पूर्ण करे, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और सुंदर वातावरण उपलब्ध हो सके।
बरसात से पहले परियोजना पूर्ण की जाएकरीब 50 एकड़ क्षेत्र में फैले इस तालाब के पुनरुज्जीवन कार्य की शुरुआत के बाद कुछ समय तक काम चला, लेकिन अब महीनों से कार्य बंद पड़ा है। तालाब परिसर में जगहजगह बड़ेबड़े गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। बरसात नज़दीक आने के कारण इन गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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तालाब के आसपास का क्षेत्र अत्यंत व्यस्त है, जहाँ नागरिक, छोटे बच्चे और वाहनधारक लगातार आवाजाही करते हैं। ऐसे में अधूरा पड़ा काम उनके लिए खतरा बन गया है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पर गंभीरता से ध्यान देकर कार्य तुरंत शुरू किया जाए और बरसात से पहले परियोजना पूर्ण की जाए।
ड्रीम प्रोजेक्ट रखडने से नाराज़गीकेंद्र सरकार की अमृत योजना अंतर्गत शिवर तालाब सौंदर्यीकरण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। विधायक रणधीर सावरकर के मार्गदर्शन में अकोला महानगर पालिका ने इस परियोजना को मंजूरी दिलाई थी।
पाइंटरकिए गए थे अनेक वादेइस प्रकल्प से भूजल स्तर में वृद्धि, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर और नागरिकों के लिए मनोरंजन व विश्राम स्थल उपलब्ध होने की अपेक्षा थी। लेकिन काम ठप पड़ने से नागरिकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
यदि प्रशासन ने समय रहते काम पूरा किया, तो यह तालाब क्षेत्र के लिए विकास का केंद्र बन सकता है। अन्यथा बरसात में अधूरे गड्ढे और अव्यवस्थित परिसर नागरिकों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनेंगे।
