प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
AkolaMining Department News: अक्टूबर 2025 में शुरू हुई निविदा प्रक्रिया फरवरी 2026 तक भी जारी है। तीन महीनों में आठ बार निविदा प्रक्रिया अपनाने के बावजूद जिले के 38 में से केवल 17 रेत घाटों की ही निकाली हो सकी है। शेष 21 घाटों की निलामी अब भी प्रलंबित है। इस कारण नौवीं बार निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यदि यह भी सफल नहीं हुई तो लाखों रुपये का राजस्व बर्बाद होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक न लग पाने का सीधा असर निलामी पर दिखाई दे रहा है। खनिकर्म विभाग ने सितंबर से नवंबर के बीच पर्यावरण विभाग से अनुमति प्राप्त कर नई रेत नीति के अनुसार अक्टूबर 2025 में निलामी प्रक्रिया शुरू की थी। दिसंबर तक पांच बार निविदा मंगाने पर भी अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला।
नवंबर में तीन बार और दिसंबर में दो बार निविदा मंगाने के बाद केवल 16 घाटों की निलामी हो सकी। इसके बाद शेष 22 घाटों के लिए तीन बार प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन ठेकेदारों का प्रतिसाद नहीं मिला। आठवीं प्रक्रिया में केवल बालापुर तहसील के डोंगरगांव घाट की निलामी हुई, जिससे 13 लाख 59 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अब तक 17 घाटों से 3 करोड़ 78 लाख रुपये का राजस्व सुनिश्चित हुआ है।
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अकोला तहसील कपिलेश्वर, एकलारा, म्हैसांग, उगवा, बालापुर तहसील निंबी, बहादुरा, सागद, नागद, मांजरी, काजीखेड-2, मोखा, स्वरूपखेड, जानोरीमेल, मुर्तिजापुर तहसील कोलसरा-1, खापरवाडा-2, दुर्गवाडा, लोणसणा, सांगवी, बपोरी, पिंगला दापुरा, तेल्हारा तहसील वांगरगाव, इन 21 घाटों की निलामी अब भी अटकी हुई है और प्रशासन को राजस्व हानि की चिंता सताती है।