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मुर्तिजापुर तहसील के काटेपूर्णा नदी किनारे के किसानों ने कपास और तुअर की फसल बचाने के लिए बैराज से 15 दिन पानी देने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि यदि सिंचाई के लिए पानी देना संभव नहीं है, तो फसल पर हुए खर्च के आधार पर मुआवजा दिया जाए।
प्रगति शेतकरी मंडल ने दशहरे से पहले ठोस निर्णय नहीं होने पर उमई से जांभा बु. मार्ग पर काटेपूर्णा नदी के पुल पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
Akola Farmers Protest: अकोला जिले के मुर्तिजापुर तहसील में सूखे जैसे हालात के बीच काटेपूर्णा नदी किनारे के किसानों की कपास और तुअर की फसलें पानी के अभाव में सूखने की कगार पर हैं।
ऐसे में किसानों ने काटेपूर्णा बैराज से सिंचाई के लिए 15 दिन पानी देने अथवा फसल पर हुए खर्च के आधार पर प्रति एकड़ 30 से 40 हजार रुपए तक मुआवजा देने की मांग की है। प्रगति शेतकरी मंडल ने पूर्व सूचना दी है कि दशहरे से पहले ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो दशहरे के दिन उमई से जांभा बु. मार्ग पर काटेपूर्णा नदी के पुल पर आंदोलन किया जाएगा।
पानी नहीं तो फसल लागत के अनुसार मुआवजा दें किसानों ने स्पष्ट किया कि पेयजल के लिए पानी आरक्षित रखने पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन पेयजल व्यवस्था प्रभावित किए बिना खड़ी फसलों को बचाने के लिए कम से कम 15 दिन सिंचाई की अनुमति दी जाए। साथ ही बंद किए गए बिजली कनेक्शन दोबारा जोड़े जाएं।
यदि सिंचाई के लिए पानी देना संभव नहीं है, तो प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 30 से 40 हजार रु. तक मुआवजा दिया जाए। प्रगति शेतकरी मंडल के अध्यक्ष राजू वानखड़े और सदस्यों ने प्रशासन को इस संबंध में लिखित सूचना दी है। मंडल ने सूचना दी है कि दशहरे से पहले निर्णय नहीं हुआ, तो काटेपूर्णा नदी के पुल पर आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने कहा कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि फसल बचाने के लिए पानी या नुकसान की भरपाई के रूप में ठोस निर्णय चाहिए।
किसानों के अनुसार, काटेपूर्णा नदी किनारे की लिफ्ट सिंचाई योजनाएं सरकार की अधिसूचना के बाद बंद कर दी गई है। इन योजनाओं की बिजली आपूर्ति भी काट दी गई है। गया है। खेतों में दरारें पड़ रही हैं और कपास व तुअर की फसलें बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि बैराज का निर्माण सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। इसके लिए किसानों ने अपनी जमीन भी दी। अब खेती की तैयारी, बीज, खाद और मजदूरी पर हजारों रुपए खर्च करने के बाद पानी नहीं मिलने से उनकी मेहनत पर पानी फिरने की आशंका है।