Akola Municipal Corporation News: अकोला महानगरपालिका प्रशासन द्वारा अपनाई गई क्लब टेंडर नीति के कारण शहर के विकास कार्यों की स्थिति अस्तव्यस्त हो गई है।
एक ही टेंडर में कई कामों को शामिल करने से बड़े ठेकेदारों को लाभ मिला है, जबकि स्थानीय छोटे ठेकेदारों पर भूखमरी की नौबत आ गई है। वर्कऑर्डर मिलने के बावजूद बड़े ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं कर रहे हैं, जिससे शहर के विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं।
प्रशासन ने कामों का एकीकरण कर क्लब टेंडर निकाले, जिससे केवल गिनेचुने बड़े ठेकेदारों को ही काम मिला। इन ठेकेदारों ने अपनी सुविधा अनुसार काम शुरू किया और कई जगह सड़कें खोदकर छोड़ दीं या सामग्री डालकर काम अधूरा छोड़ दिया।
दर्जे में भी समझौता कर निकृष्ट गुणवत्ता के काम सामने आ रहे हैं। कनिष्ठ अभियंताओं की जिम्मेदारी होने के बावजूद ठेकेदारों के दबाव के कारण वे कार्रवाई करने में असमर्थ हैं।
मनपा सर्कल में यह चर्चा है कि वरिष्ठों से कनिष्ठ स्तर तक कमीशन का बंटवारा तय है, जिसके चलते ठेकेदारों पर सख्ती करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है।
सामान्य नागरिकों के सवाल अनसुने शहर में सड़क, नालों और अन्य नागरिक सुविधाओं के काम अधूरे रहने से अकोला के नागरिकों में तीव्र रोष है। लोग पूछ रहे हैं कि काम कब शुरू होगा और जो काम हुआ वह इतनी जल्दी क्यों खराब हो गया।
नागरिकों के दबाव में जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों के बीच छुपे रिश्तों के कारण आम जनता के सवालों को दरकिनार किया जा रहा है।
इस तरह क्लब टेंडर नीति ने अकोला मनपा में अनियमितता और अव्यवस्था को जन्म दिया है। इसका सीधा असर शहर के विकास और करदाताओं पर पड़ रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या इस मामले की गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी या नहीं।
कैप्शन: अकोला. मनपा प्रवेश द्वार. फोटो फाइल नेम 14 अरुण फोटो 59
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