अकोला मनपा में MIM की तटस्थता पर सियासी घमासान, भाजपा ने सत्ता समीकरण साधकर जीत पक्की की
Akola Bjp News: अकोला मनपा में भाजपा ने संख्याबल साधकर सत्ता हासिल की, एमआईएम की तटस्थता से कांग्रेस के प्रयास विफल हुए। सभागृह में तनाव रहा, गठबंधन व निर्दलीय समर्थन से भाजपा को बहुमत मिला।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Akola Mayor Election: अकोला महानगरपालिका में संख्याबल का समीकरण साधते हुए सत्ता पर कब्जा करने में भाजपा को सफलता मिली है, लेकिन एमआईएम द्वारा अपनाई गई तटस्थ भूमिका ने कई चर्चाओं को जन्म दिया। इस भूमिका के कारण कांग्रेस के विरोधियों को साथ लेकर सत्ता स्थापित करने के प्रयास असफल हो गए। इसी कारण शुक्रवार की सभा में कुछ समय के लिए हंगामा भी हुआ। शुक्रवार को मनपा सभागृह में विशेष सभा आयोजित की गई। चुनाव में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल तो बन गया, लेकिन बहुमत का आंकड़ा वह हासिल नहीं कर पाया।
ऐसे समय में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेसी विधायक साजिद खान पठान ने अंतिम क्षण तक जोरदार प्रयास किए। मगर उनके इन प्रयासों पर एमआईएम की तटस्थता ने पानी फेर दिया। बहुमत का गणित साधने के लिए भाजपा ने शहर सुधार आघाड़ी के नाम से गठबंधन किया और उसमें शामिल होने का निमंत्रण शरद पवार के दल को दिया।
विरोधियों के साथ कई बैठकों में उपस्थित रहे रफीक सिद्दीकी समेत तीन पार्षदों ने अंततः भाजपा की आघाड़ी को समर्थन देने का निर्णय लिया, जिससे विधायक पठान की ताकत कमजोर हो गई। इसके बावजूद पठान को अंत तक यह उम्मीद थी कि राकांपा शरद पवार गुट के पार्षद, एमआईएम के पार्षद और निर्दलीय चुने गए पार्षद आशीष पवित्रकार उनके साथ आएंगे। लेकिन आज के मतदान ने उन्हें यह अनुभव कराया कि सत्ता कुछ भी कर सकती है।
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सभागृह में कुछ समय के लिए रहा तनाव
महापौर और उपमहापौर पद के चुनाव के बाद सभागृह में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना रहा। कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने एमआईएम के पार्षदों पर चूड़ियां फेंकने का आरोप लगाया। अकोला में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस किसी भी पद पर दावा नहीं करेगी, ऐसी घोषणा विधायक पठान ने की थी। लेकिन कांग्रेस के आज़ाद खान ने उपमहापौर पद के लिए नामांकन दाखिल कर उनकी घोषणा को निष्प्रभ करने का काम किया।
