काली पट्टियां बांधकर खेतों की मेड़ पर प्रदर्शन, अकोला में सूखा घोषित करने की मांग पर अड़े रहे किसान

Akola Farmers Protest: अकोला जिले में बारिश की कमी से सोयाबीन, मूंग और उड़द समेत खरीफ फसलें संकट में हैं। किसानों ने 4 घंटे आंदोलन कर सूखा घोषित करने व मुआवजे की मांग की।
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अकोला किसान आंदोलन(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Drought In Akola: बारिश ने साथ छोड़ दिया है और खरीफ की फसलें संकट में फंस गई हैं। किसानों की पीड़ा प्रशासन तक पहुंचाने के लिए क्रांतिकारी किसान संगठन ने गुरुवार को बोरगांव खुर्द-डाबकी जहांगीर मार्ग पर सीधे किसानों के मेड़ पर चार घंटे तक आक्रामक आंदोलन किया। सोयाबीन, मूंग, उड़द सहित विभिन्न खरीफ फसलें पानी की कमी से सूखने की स्थिति में हैं। किसानों पर भारी आर्थिक संकट आ पड़ा है।

इस कारण किसानों ने मांग की कि जिले में तुरंत सूखा घोषित किया जाए, प्रत्येक नुकसानग्रस्त खेत का प्रत्यक्ष पंचनामा किया जाए, प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये मुआवजा दिया जाए, फसल बीमा का न्यायपूर्ण लाभ मिले और कर्जमाफी की घोषणा की जाए, आंदोलन में बोरगांव खुर्द, डाबकी जाहगीर, पातुर-नंदापुर, सोनखास, कव्हला, जाहगीर, दुधलम, कुरणखेड, बोरगांव मंजू, जवला बु, कोलंबी सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

बोरगांव खुर्द में फसलें सूखी

आंदोलन के दौरान किसानों ने हाथ और सिर पर काली पट्टियां बांधकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। आंदोलन स्थल पर सरकार का प्रतीकात्मक पुतला रखा गया और गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। बारिश न होने से फसलों की बढ़त रुक गई है और सोयाबीन, मूंग, उड़द सहित कई फसलों के बड़े नुकसान की आशंका है। किसानों ने माँग की कि केवल कागजी निरीक्षण न होकर प्रत्येक खेत में जाकर प्रत्यक्ष पंचनामा किया जाए।

किसान आक्रोशित संगठन की प्रमुख मांगें

अकोला जिले में तुरंत सूखा घोषित किया जाए। प्रत्येक नुकसानग्रस्त खेत का प्रत्यक्ष पंचनामा किया जाए। किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए, फसल बीमा का पूर्ण और न्याय लाभ दिया जाए।सूखा प्रभावित किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा की जाए। पशुओं के लिए चारा और पीने के पानी की व्यवस्था की जाए। जिलाधिकारी, कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी सीधे किसानों के मेड़ पर जाकर निरीक्षण करें।

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प्रशासन से की गई चर्चा

जिलाधिकारी आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंचे। अंततः प्रशासन की ओर से तहसीलदार और कृषि अधिकारी वहीं पहुंचे। उन्होंने किसानों से चर्चा कर उनकी मांगे शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। लेकिन किसानों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए, संगठन ने सरकार को 12 से 13 सितंबर तक की समयसीमा दी है।

जिलाधिकारी ने किया फसलों का निरीक्षण

जिले में अनेक स्थानों पर बारिश न होने के कारण फसलों की स्थिति बिगड़ गई है। गुरुवार को जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने जिले के अनेक स्थानों पर प्रत्यक्ष रूप से फसलों का निरीक्षण किया। उन्होंने आदेश दिए कि तत्काल फसलों का प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

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