नायगांव ट्रांसफर स्टेशन का उपमहापौर अमोल गोगे ने किया निरीक्षण तस्वीर ( सोर्स: नवभारत)
Akola Municipal Corporation News: अकोला उपमहापौर अमोल गोगे ने नायगांव स्थित ट्रांसफर स्टेशन का दौरा कर वहां की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन पर चल रहे कामकाज की विस्तृत जानकारी ली और स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उपमहापौर गोगे ने स्पष्ट कहा कि शहर के प्रत्येक घर से कचरा संकलन होना अनिवार्य है।
उन्होंने सभी ट्रैक्टर चालकों को निर्देश दिया कि प्रभागों से कचरा ट्रॉली में पूरी क्षमता तक भरकर ही ट्रांसफर स्टेशन पर लाया जाए। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करें और उसे केवल नगर निगम की कचरा घंटा गाड़ी में ही डालें। उन्होंने कहा कि नागरिकों को इस दिशा में जागरूक करना आवश्यक है ताकि शहर में स्वच्छता का स्तर और बेहतर हो सके। उपमहापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि कचरा कहीं भी खुले में या गलियों में न फेंका जाए। इसके लिए स्वच्छता विभाग को
नागरिकों को प्रेरित करने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि हर घर से समय पर कचरा संकलन होगा और नागरिक भी सहयोग करेंगे तो शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना संभव होगा। इस निरीक्षण के दौरान स्वच्छता विभाग प्रमुख प्रशांत राजुरकर, स्वच्छता निरीक्षक धनराज पचेरवाल तथा विभाग के अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
निरीक्षण के अंत में उपमहापौर गोगे ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी तत्परता और ईमानदारी से करें। उन्होंने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपमहापौर ने नायगांव ट्रांसफर स्टेशन का निरीक्षण कर शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ बनाने के लिए ठोस निर्देश दिए। उन्होंने नागरिकों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने और उसे केवल नगर निगम की गाड़ियों में डालने की अपील की।
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अकोला उपमहापौर ने अधिकारियों से कहा कि ट्रांसफर स्टेशन की कार्यप्रणाली को और अधिक व्यवस्थित किया जाए ताकि कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छता विभाग को चाहिए कि वह नागरिकों को गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण के महत्व के बारे में लगातार जागरूक करे। इसके लिए प्रचार-प्रसार के साधनों का उपयोग किया जाए और लोगों को समझाया जाए कि कचरे का सही प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए कितना आवश्यक है।