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अकोला: वैशाख मास में 28 अप्रैल को रखा जाएगा ‘भौम प्रदोष व्रत’, जानें शिव पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Akola News: वैशाख मास का दूसरा प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन विधिविधान से पूजा करने से जीवन में सुखसमृद्धि, वैवाहिक सौहार्द और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • Author By manoj choubey | published By रूपम सिंह |
Updated On: Apr 23, 2026 | 03:39 PM
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Akola Bhauma Pradosh Vrat News:  हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधिविधान से शिव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है। साथ ही शिवपार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वैशाख मास का दूसरा प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ अवसर है।

इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से जीवन में सुखसमृद्धि, वैवाहिक सौहार्द और शिवपार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत का समय और तिथिपंचांग गणना के अनुसार वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 अप्रैल को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर होगा और इसका समापन 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट पर होगा।

प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा करना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस बार 28 अप्रैल को प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि व्याप्त रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत रखना उचित है। चूंकि यह मंगलवार को पड़ रहा है, अतः इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

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प्रदोष व्रत का महत्वमहर्षि सूत ने इस व्रत का महत्व बताते हुए कहा था कि कलियुग में जब मनुष्य धर्म से भटककर अधर्म की राह पर जाएगा और अन्यायअनाचार का बोलबाला होगा, तब प्रदोष व्रत ही ऐसा साधन होगा जो शिव की कृपा दिलाएगा।

इस व्रत से सभी प्रकार के कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि इस दिन शिवपार्वती की विशेष पूजा की जाती है।

  • पूजा विधिव्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लेकर सूर्य को जल अर्पित करें। शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का गंगाजल, दूध, शहद आदि से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष मंत्रजप करें। भोग लगाकर भौम प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में शिवपार्वती की आरती करें।
  • वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि आरंभ 28 अप्रैल, शाम 651 बजे। समाप्ति 29 अप्रैल, शाम 751 बजे। पूजा का श्रेष्ठ समय सूर्यास्त से लेकर डेढ़ घंटे तक का प्रदोष काल

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Published On: Apr 23, 2026 | 03:08 PM

Topics:  

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