अकोला में सरपंच पर रिश्वत मांगने का आरोप, महिलाओं के प्रशिक्षण भुगतान के बदले मांगे 46 हजार रुपये

Corruption Case: अकोला महिलाओं के सिलाई प्रशिक्षण बिल के भुगतान के बदले 46 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में तत्कालीन सरपंच वनमाला वाघ और उनके पति के खिलाफ एसीबी ने मामला दर्ज किया है।
Akola Anti Corruption Bureau Bribery Case
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Akola Anti Corruption Bureau Bribery Case: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अकोला जिले में एक बार फिर बड़ी और कड़क कार्रवाई करते हुए सरकारी तंत्र में मची घूसखोरी का पर्दाफाश किया है। बालापुर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चिंचोली गणू में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयोजित सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम के वैध बिलों का भुगतान जारी करने के एवज में मोटी घूस मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है।

\इस भ्रष्टाचार के खेल में संलिप्त रहने के आरोप में ग्राम पंचायत की तत्कालीन सरपंच तथा वर्तमान प्रशासक वनमाला वाघ और उनके पति कैलास वाघ के खिलाफ एसीबी ने मामला दर्ज करने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

महिलाओं के 3 दिवसीय प्रशिक्षण के लिए मंजूर हुए थे 66,700 रुपये

एसीबी कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले के शिकायतकर्ता चिंचोली गणू स्थित 'अथांग बहुउद्देशीय संस्था' के सचिव हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान सरकार की 15वें वित्त आयोग योजना के अंतर्गत चिंचोली गणू ग्राम पंचायत द्वारा स्थानीय महिलाओं के कौशल विकास के लिए तीन दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी इस संस्था को आधिकारिक तौर पर सौंपी गई थी। इस सामाजिक और कल्याणकारी कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सरकार द्वारा कुल 66,700 रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। संस्था ने पूरी ईमानदारी के साथ 5 से 7 जून 2025 के दौरान महिलाओं के लिए इस प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया और नियमानुसार कार्य पूरा होने के बाद अपने खर्चे के बिल अकोला ग्राम पंचायत के समक्ष भुगतान के लिए प्रस्तुत कर दिए।

46 हजार की घूस मांगी

संस्था के सचिव को उम्मीद थी कि महिलाओं के हित में किए गए कार्य का पैसा जल्द मिल जाएगा, लेकिन भ्रष्टाचार की दीमक ने यहां भी अपना रास्ता बना लिया था। दर्ज शिकायत के मुताबिक, स्वीकृत राशि का check या भुगतान जारी करने के बदले तत्कालीन सरपंच वनमाला वाघ ने संस्था के पदाधिकारियों से सीधे 46 हजार रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग कर दी। संस्था के बार-बार अनुरोध करने के बाद कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच एक गुप्त समझौता हुआ, जिसके तहत घूस की राशि घटाकर 20 हजार रुपये नकद लेने पर सहमति बनी। चूंकि शिकायतकर्ता संस्था के पदाधिकारी इस अवैध घूसखोरी के सख्त खिलाफ थे और रिश्वत देने के बिल्कुल इच्छुक नहीं थे, इसलिए उन्होंने सीधे अकोला एसीबी (Anti Corruption Bureau) के कार्यालय का दरवाजा खटखटाया और लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

सदाबहार होटल में हुआ था घूस का सत्यापन

शिकायत मिलने के तुरंत बाद एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बुनना शुरू किया। गत 9 अप्रैल 2026 को अकोला स्थित प्रसिद्ध 'सदाबहार होटल' में घूस मांगे जाने की प्राथमिक सत्यता की जांच (वेरिफिकेशन) की गई। इस जांच और रिकॉर्डिंग के दौरान साफ तौर पर पुष्टि हुई कि तत्कालीन सरपंच वनमाला वाघ ने न केवल घूस मांगी थी, बल्कि समझौते के 20 हजार रुपये स्वीकार करने की पूरी तैयारी भी दर्शाई थी। वहीं उनके पति कैलास वाघ पर इस पूरे रिश्वत के काले लेनदेन में मध्यस्थ (दलाल) की भूमिका निभाते हुए घूस की मांग को लगातार प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने का पुख्ता आरोप लगा है।

इस सत्यापन के आधार पर आरोपियों को रंगे हाथों दबोचने के लिए एसीबी की टीम ने 11 अप्रैल और फिर 23 अप्रैल 2026 को दो बार भारी घेराबंदी कर जाल (ट्रैप) बिछाया। परंतु, शातिर आरोपियों को ऐन वक्त पर शिकायतकर्ता की कुछ हरकतों और गतिविधियों पर गहरा संदेह हो गया, जिसके चलते वे सतर्क हो गए और उन्होंने घूस की रकम हाथ में लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, एसीबी के पास प्राथमिक जांच में ही आरोपियों के खिलाफ रिश्वत मांगने के डिजिटल और मौखिक रूप से पर्याप्त व अकाट्य सबूत लग चुके हैं।

साक्ष्यों के आधार पर एसीबी ने बिना देर किए दोनों आरोपियों के खिलाफ स्थानीय सिविल लाइन पुलिस थाने में विभिन्न भ्रष्टाचार निवारण धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस कार्रवाई से जिला पंचायत और प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मच गया है।

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