अकोला में खरीफ सीजन की हलचल: सतपुड़ा की तलहटी में मानसून पूर्व कपास की बुआई तेज
Cotton Farming: अकोला जिले के अकोट तहसील में मानसून पूर्व कपास की बुआई का काम जोरों पर है। सतपुड़ा की तलहटी वाले क्षेत्रों में किसान ड्रिप और बेड पद्धति जैसी आधुनिक तकनीकों से कपास बो रहे हैं।
Cotton Cultivation सोर्सः फाइल फोटो- (सोशल मीडिया)
Cotton Sowing Akola: अकोट तहसील के सतपुड़ा पर्वत की तलहटी में स्थित बोर्डी, शिवपुर, रामापुर तथा आसपास के क्षेत्रों में मानसून पूर्व कपास की बुआई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। सिंचाई सुविधाओं वाले इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर कपास की खेती की तैयारियों और बुआई में जुट गए हैं। हर वर्ष मई माह के अंतिम सप्ताह में कपास की बुआई करने की परंपरा को कायम रखते हुए इस वर्ष भी किसानों ने समय से पहले खेती कार्य शुरू कर दिए हैं। किसानों का मानना है कि समय पर बुआई करने से उत्पादन में वृद्धि होती है, इसलिए उन्होंने पहले से ही आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इस वर्ष अप्रैल और मई माह में भीषण गर्मी पड़ने के कारण खेतों की तैयारी, बेड निर्माण, ट्रैक्टर से मेढ़ एवं नालियां तैयार करने तथा सिंचाई व्यवस्था विकसित करने जैसे कार्य प्रभावित हुए थे। कई स्थानों पर मिट्टी की नमी पूरी तरह समाप्त हो जाने से खेतों की तैयारी के लिए अतिरिक्त पानी देना पड़ा। हालांकि पिछले सप्ताह से तापमान में गिरावट आई है और बादलों की आवाजाही तथा ठंडी हवाओं के कारण गर्मी का असर कम हुआ है, जिससे खेती कार्यों को गति मिली है।
आधुनिक तकनीक से हो रही कपास की बुआई
सिंचाई सुविधाओं वाले क्षेत्रों में किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति की मदद से बेड पद्धति पर कपास की बुआई कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि आधुनिक तकनीक अपनाने से पानी की बचत होती है और फसल की बढ़वार भी बेहतर होती है। कई स्थानों पर ट्रैक्टर चालित मशीनों से बेड तैयार किए जा रहे हैं, जबकि मजदूरों की सहायता से बीज बोने का कार्य जारी है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में खेत मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा है।
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बिजली आपूर्ति की समस्या बनी चिंता
किसानों ने बताया कि दिन के समय अपर्याप्त बिजली आपूर्ति, बारबार होने वाले बिजली कटौती और कम वोल्टेज के कारण सिंचाई प्रबंधन प्रभावित हो रहा है। समय पर पानी नहीं मिलने से बीजों की अंकुरण क्षमता प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। किसानों ने कृषि पंपों के लिए नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति की मांग की है।
