अकोला-अकोट हाईवे पर सुविधाओं का अभाव, पेड़-बस शेड बिना टोल वसूली की तैयारी, प्रहार संगठन की आंदोलन चेतावनी

Akola News: अकोट राष्ट्रीय राजमार्ग का काम पूरा हो गया है, लेकिन बस स्टॉप, शौचालय और छायादार पेड़ों जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। प्रहार संगठन ने सुविधाएं मिलने तक टोल वसूली का कड़ा विरोध किया है।
The Akola-Akot National Highway lacks basic amenities like bus sheds and trees. Prahar Sanghatana has threatened intense protests against toll collection until facilities are provided.
अकोला से अकोट राष्ट्रीय राजमार्ग टोल वसूली (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Akola-Akot National Highway News: लंबे इंतजार के बाद अकोट से अकोला तक का राष्ट्रीय राजमार्ग तैयार तो हो गया है, लेकिन इस मार्ग पर यात्रियों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह अभाव दिखाई दे रहा है। एक ओर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा की अनदेखी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर टोल वसूली शुरू करने की जल्दबाजी ने नागरिकों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।

इस मार्ग के निर्माण के दौरान अनेक दुर्घटनाओं में निर्दोष नागरिकों की जानें गईं। अब सड़क चौड़ी और सुगम हो चुकी है, लेकिन यात्रियों के लिए आवश्यक बस स्टॉप, यात्री शेड, पेयजल की व्यवस्था और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

विशेष रूप से, सड़क निर्माण के दौरान हजारों पुराने वृक्ष काट दिए गए, परंतु आज 45-50 कि।मी। लंबे इस मार्ग पर छाया देने वाला एक भी पेड़ शेष नहीं है। भीषण गर्मी में यात्रियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का आरोप है कि सुविधाएं दिए बिना टोल वसूली करना जनता की जेब पर सीधा बोझ डालने जैसा है। मुद्दे पर प्रहार संगठन ने आक्रामक रुख अपनाया है। संगठन के अकोला जिला उपाध्यक्ष जीवन

प्रहार संगठन का आक्रामक रुख

इस खवले ने प्रशासनिक नीतियों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि केवल डामरीकरण से सड़क पूर्ण नहीं होती। यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पहले पौधारोपण, फिर करें वसूली

जब तक वृक्षारोपण और यात्री निवास की व्यवस्था पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी परिस्थिति में टोल वसूली शुरू नहीं करने दी जाएगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि इन मांगों को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी कार्यालय पर तीव्र आंदोलन किया जाएगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मामले में जनप्रतिनिधियों को मौन तोड़कर स्पष्ट भूमिका निभानी चाहिए।

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