Akola News: बाल विवाह के खिलाफ चलाए गए बाल विवाह मुक्ति रथ ने एक महीने में 3,750 किमी की यात्रा कर 300 गांवों में जनजागृति की. यह अभियान केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मार्गदर्शन में इंडियन सोशल वेलफेयर सोसायटी और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की मदद से 100 दिनों तक चलाया गया. देशभर में आयोजित इस जागरूकता अभियान के अंतर्गत अकोला जिले के शहरों और गांवों में पहुंचकर नागरिकों को सहभागी बनाया गया. सोसायटी के संचालक अशोक बेलेकर ने बताया कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि यह बच्चों पर जबरन विवाह और यौन शोषण जैसा गंभीर अपराध है.
यह कानूनन दंडनीय है और बालिका के जीवन की संभावनाओं को नष्ट कर उसे कुपोषण, निरक्षरता और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है. इस अभियान में जगहजगह बाल विवाह निर्मूलन के लिए कानून, संरक्षण और जिम्मेदारी की शपथ दिलाई गई. शैक्षणिक संस्थाओं, धार्मिक नेताओं को भी इसमें शामिल किया गया.
विवाह समारोहों में सेवा देने वाले आचारी, सजावटकार, मंगल कार्यालय संचालक और वाजंत्री समूहों से संपर्क कर उनसे बाल विवाह में सेवा न देने की अपील की गई. सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह मुहिम एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है. बाल विवाह के खिलाफ समाज में जागरूकता बढ़ाने और इसे समाप्त करने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है. कैप्शन अकोला. मुक्ति रथ का शुभारंभ करते हुएअधिकारी. फोटो फाइल नेम 10 अरुण फोटो 63