अकोला मनपा में 8 स्वीकृत पार्षदों (सौजन्य-नवभारत)
Akola Municipal Corporation News: अकोला मनपा में सोमवार को आयोजित विशेष सभा में बहुप्रतीक्षित स्वीकृत पार्षदों की नियुक्ति प्रक्रिया हुई। इसमें सत्ताधारी भाजपा आघाड़ी के 4, कांग्रेस के 2, शिवसेना (उबाठा) और वंचित बहुजन आघाड़ी के 1-1 सदस्य, इस प्रकार कुल 8 पार्षदों का चयन किया गया। महापौर शारदा खेडकर, उप महापौर अमोल गोगे, स्थायी समिति सभापति विजय अग्रवाल ने नव नियुक्त पार्षदों का स्वागत किया। इस विशेष सभा में मनपा के अतिरिक्त आयुक्त सुमेध अलोणे, मनपा के नगर सचिव अमोल डोईफोड़े प्रमुखता से उपस्थित थे।
भाजपा ने पूर्व उपमहापौर सुनील मेश्राम, एड. गिरीश गोखले, एड. देवाशीष काकड और चंदा शर्मा को अवसर दिया। महिला प्रतिनिधित्व के लिए चंदा शर्मा को चुना गया। एड. गिरीश गोखले, चंदा शर्मा की नियुक्ति से संपूर्ण हिंदी और मराठी भाषी ब्राम्हण समाज में हर्ष की लहर देखी जा रही है। भाजपा के शहर महासचिव एड. देवाशीष काकड की नियुक्ति को पार्टी निष्ठा का सम्मान माना जा रहा है।
वंचित बहुजन आघाड़ी ने सभी को चौंकाते हुए अकोला के प्रसिद्ध उद्योजक और नरेडको के संस्थापक अध्यक्ष सुनील इन्नानी को पार्षद पद पर नियुक्त किया। इन्नानी रियल इस्टेट और गृह निर्माण के क्षेत्र से जुड़े हैं और माहेश्वरी समाज से आते हैं। इस निर्णय को वंचित ने नया समीकरण बनाने का प्रयास बताया है। गृह निर्माण क्षेत्र के साथ साथ माहेश्वरी समाज में भी हर्ष का वातावरण है।
कांग्रेस ने दिया कवड़े और पठान को मौका कांग्रेस ने जिला युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष आकाश कवड़े तथा सक्रिय कांग्रेसी कार्यकर्ता गुड्डू पठान की स्वीकृत पार्षद के रूप में नियुक्ति की है कांग्रेसी विधायक साजिद खान पठान तथा कांग्रेस के महानगराध्यक्ष डा. प्रशांत वानखड़े ने दोनों का स्वागत किया।
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शिवसेना (उबाठा) ने प्रभाग 20 में कम वोट से चुनाव हारनेवाले शंकर लंगोटे को अवसर दिया है।
नियमों के अनुसार मनपा में साहित्य, कला, विज्ञान, सहकार, सामाजिक कार्य, चिकित्सा, शिक्षा, अभियांत्रिकी या विधि क्षेत्र में कम से कम 5 वर्ष का अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को ही स्वीकृत पार्षद नियुक्त किया जा सकता है। अब नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि अकोला मनपा की इस नियुक्ति प्रक्रिया में इन निकषों का पालन हुआ है या नहीं। इस प्रकार, स्वीकृत पार्षदों की नियुक्ति से मनपा में नए समीकरण बने हैं। भाजपा ने अपनी आंतरिक नाराजगी शांत करने और महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की रणनीति अपनाई, वहीं वंचित ने उद्योजक को मौका देकर नया राजनीतिक संदेश दिया।