अकोला में गजानन पतसंस्था घोटाला: 10 संचालकों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज, गिरफ्तारी की तलवार लटकी!
Akola MPID Court News: अकोला गजानन पतसंस्था के 16.79 करोड़ रुपये घोटाले में 10 संचालकों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज। मुख्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार, 2 अन्य पर फैसला 15 जून को आएगा।
- Written By: केतकी मोडक
न्यायालय प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Cooperative Society Fraud In Akola: अकोला के पुराना शहर के डाबकी रोड स्थित श्री गजानन नागरी सहकारी पतसंस्था में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में अब पूरे संचालक मंडल की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय निवेशकों की गाढ़ी कमाई डकारने के आरोप में घिरे इस पतसंस्था के 10 संचालकों को अदालत से करारा झटका लगा है।
गिरफ्तारी के डर से कानून की शरण में पहुंचे इन संचालकों की अग्रिम जमानत याचिका को MPID विशेष न्यायालय ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिसिया कार्रवाई तेज होने के आसार हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में हुआ था 16.79 रुपये करोड़ की हेराफेरी का भंडाफोड़
यह पूरा मामला तब गरमाया जब अकोला जिला उपनिबंधक सहकारी संस्था कार्यालय द्वारा पतसंस्था के पिछले तीन वर्षों के खातों का गहन वित्तीय लेखा परीक्षण कराया गया। इस अंतिम ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि संस्था के भीतर 16 करोड़ 79 लाख रुपये की भारी आर्थिक अनियमितता और गबन किया गया है।
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यह रिपोर्ट पुलिस को सौंपे जाने के बाद जिला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने पूरे संचालक मंडल के खिलाफ धोखाधड़ी का संगीन मामला दर्ज किया था। इसके तुरंत बाद पुलिस ने मुख्य संचालक नारायण आवारे और उनके बेटे नंदकिशोर आवारे को गिरफ्तार कर लिया था, जो फिलहाल जेल में बंद हैं।
इन 10 संचालकों की याचिकाएं हुईं निरस्त
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिसिया कार्रवाई के डर से कुल 15 संचालकों ने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए गुहार लगाई थी। विशेष न्यायाधीश पी.बी. नाईकवाडे की अदालत में चली लंबी बहस के बाद जिन 10 संचालकों की याचिकाएं खारिज की गईं, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- शिवलाल बोर्डे, हनुमंत खानजोडे, रमेश थोरात, रामराव घाटे, प्रमोद भटुरकर, राजेश अनासने, काशीराम मेगे, नरेश डोंगरे, सुनंदा उजवणे और प्रमिला शिंगारे।
अदालत में संचालकों की ओर से एडवोकेट पी.डी. गोयनका ने पैरवी की, जबकि निवेशकों का पक्ष और सरकारी पक्ष मजबूती से रखते हुए सरकारी वकील एडवोकेट राजेश अकोटकर ने जमानत का कड़ा विरोध किया।
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दो स्वीकृत संचालकों के भाग्य का फैसला 15 जून को
इस पूरे प्रकरण में पतसंस्था के दो स्वीकृत संचालकों पर सस्पेंस अभी भी बरकरार है। स्वीकृत संचालक विजय लोले को अदालत से फिलहाल अंतरिम अग्रिम जमानत मिली हुई है, लेकिन उनकी स्थायी अग्रिम जमानत पर अंतिम आदेश आना बाकी है।
वहीं, दूसरे स्वीकृत संचालक धर्मनाथ इंगले की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इन दोनों मामलों पर एमपीआईडी कोर्ट 15 जून को अपना अंतिम आदेश सुनाएगा, जिस पर पूरे अकोला जिले के निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।
