अमरावती में तेंदुए की खाल के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार, वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की जांच तेज
Leopard Skin Seized: अमरावती में तेंदुए की खाल के साथ MP के तीन आरोपी गिरफ्तार। गुगामल वन्यजीव विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
- Written By: केतकी मोडक
ज़ब्त तेंदुए की खाल (सोर्स - फोटो नवभारत)
Wildlife Trafficker Arrested In Amravati: वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ गुगामल वन्यजीव विभाग को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वन विभाग के वन्यजीव अपराध नियंत्रण कक्ष, हरिसाल वन परिक्षेत्र की टीम और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक स्वयंसेवी संस्था ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर तेंदुए की खाल का टुकड़ा अवैध रूप से अपने पास रखने वाले तीन आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से सीमावर्ती राज्यों के वन्यजीव तस्करों में हड़कंप मच गया है।
मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं तीनों आरोपी
वन विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों के तार पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से जुड़े हुए हैं। आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है:
- मांगीलाल किशोरी इवणे (उम्र ४५ वर्ष, निवासी चिरा, जिला बैतूल, म.प्र.)
- दीपक बाबूलाल उईके (उम्र २५ वर्ष, निवासी ढालगांव, जिला खंडवा, म.प्र.)
- कमल रतन ठाकुर (उम्र ३१ वर्ष, निवासी धामा गोलाई, जिला खंडवा, म.प्र.)
वन विभाग की टीम ने इन तीनों के कब्जे से तेंदुए की खाल का एक हिस्सा (टुकड़ा) बरामद किया है, जिसे वे अवैध रूप से बेचने या परिवहन करने की फिराक में थे।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज; बड़े नेटवर्क की तलाश
पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह मामला केवल खाल की बरामदगी तक सीमित नहीं है। प्राथमिक जांच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क काम कर रहा है।
वन विभाग अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि इस तेंदुए का शिकार कब, कहाँ और किस जंगल में किया गया था। क्या इस शिकार में मेलघाट या गुगामल वन्यजीव क्षेत्र के स्थानीय शिकारियों की भी मिलीभगत थी? इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड्स और खरीदारों की तलाश में वन विभाग की अलग-अलग टीमें रवाना की गई हैं।
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इन अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों की रही सराहनीय भूमिका
तस्करों को दबोचने वाली इस सफल छापेमारी की कमान हरिसाल की वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) शुभांगी राऊत के हाथों में थी। उनके नेतृत्व में वन्यजीव अपराध नियंत्रण कक्ष के दिनेश केंद्रे, स्वप्नील राऊत, मुकेश जावरकर, अनंता नायसे, राजेश धुमाले, मनीषा भुसुम, ज्योती धिकार के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमी चेतन भारती ने इस गुप्त ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित वनों और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों के खिलाफ यह जीरो-टॉलरेंस अभियान आगे भी जारी रहेगा।
