प्रचार के दौरान उपमुख्यमंत्री अजित पवार (फाइल फोटो)
बारामती : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया और महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री अजित पवार बारामती से एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं, हालांकि वह पिछले चुनाव के मुकाबले अबकी बार के चुनाव को काफी चुनौती पूर्ण मान रहे हैं। इसीलिए वह इस चुनाव में अपना एक इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं, ताकि किसी भी हालत में चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंच सकें। पार्टी मुखिया के चुनाव हारने का एक गलत संदेश जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपनी विधानसभा में पर्चा भरने के बाद से जीत के लिए खूंटा गाड़ रखा है। वह पिछले कई दिनों से बारामती में ही रहकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं और लोगों से संपर्क करके जमीनी हकीकत समझने की कोशिश कर रहे हैं। अजित पवार ने अपने लिए लोगों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि जिस तरह से बारामती के लोगों ने लोकसभा के चुनाव में ‘साहेब’ को खुश किया था। उसी तरह विधानसभा चुनाव में उनको खुश कर दें।
भूला नहीं है लोकसभा का झटका
आपको याद होगा कि लोकसभा चुनाव 2024 में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का मुकाबला शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से था। और इस मुकाबले में काफी मशक्कत करने के बावजूद चाचा शरद चंद पवार की बेटी सुप्रिया सुले चुनाव जीत गई और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसके बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बारामती छोड़ कहीं और से चुनाव लड़ने का मन बना रहे थे, लेकिन काफी चिंतन-मनन के बाद सीट न बदले की सोची और फिर से बारामती से पर्चा दाखिल किया।
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दे रहे पुराने रिश्ते की दुहाई
कहा जा रहा था कि बारामती में पत्नी के लोकसभा चुनाव हार जाने के बाद वह अपने लिए नए नयी विधानसभा सीट खोजने लगे थे। लेकिन पार्टी के सहयोगियों से मंथन के बाद उन्होंने इरादा बदल दिया और फिर से बारामती से चुनाव लड़ने के लिए मैदान में आ गए। वह फील्ड से मिल रही रिपोर्ट और वोटों के विभाजन के लिए अपनी नई तरह की रणनीति बना रहे हैं और इसीलिए इमोशनल कार्ड खेल कर जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। लोकसभा की तरह विधानसभा में झटका न देने के लिए लोगों से संपर्क करके पुराने रिश्ते की दुहाई दे रहे हैं और अपने लिए वोट मांग रहे हैं।
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आपको बता दें कि अजित पवार का मुकाबला उनके भतीजे युगेंद्र पवार से है। युगेंद्र पवार को जीत दिलाने और अजित पवार को सबक सिखाने के लिए शरद पवार और सुप्रिया सुले काफी जोर आजमाइश कर रहे हैं। उनका जनसंपर्क अभियान भी तेज है तथा स्थानीय नेताओं से गुपचुप मीटिंग भी की जा रही है। ताकि पार्टी तोड़कर शरद पवार की राजनीति खत्म करने की कोशिश करने वाले भतीजे को एक और बड़ा झटका दिया जा सके।