शिरडी में गैस की कमी: साईं संस्थान चूल्हों पर बना रहा प्रसाद, रोज़ 40 हजार भक्तों के लिए जल रहें चूल्हें
Shirdi Sai Baba Institution: शिरडी के साईं बाबा संस्थान में गैस की कमी के चलते प्रसाद भोजनालय में चूल्हों पर खाना बनाया जा रहा है, जहां रोज़ाना हजारों भक्तों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Shirdi Gas Shortage (सोर्सः फाईल फोटो- सोशल मीडिया)
Shirdi Gas Shortage: युद्ध जैसे हालात के कारण पूरे देश में गैस की कमी हो गई थी। हालांकि अब हालात कुछ हद तक सामान्य हो गए हैं, लेकिन इस कमी का असर अब साईं बाबा संस्थान पर भी देखने को मिल रहा है। शिरडी में साईं बाबा संस्थान के प्रसाद भोजनालय में गैस की कमी महसूस की जा रही है। इस कमी को दूर करने के लिए संस्थान रोज़ाना करीब पांच से छह चूल्हों पर सब्जियां पका रहा है। साथ ही, इन्हीं चूल्हों पर लड्डू प्रसाद और बूंदी भी तैयार की जा रही है। भोजनालय के पीछे लगभग 10 से 12 बड़े चूल्हे जलाए जा रहे हैं। 42 डिग्री तापमान में भी भोजनालय के शेफ और हेल्पर सेवा भाव से भोजन तैयार कर रहे हैं।
भोजनालय के अंदरूनी हिस्से में साईं भक्तों के लिए दाल, चावल, एक सब्जी, चपाती और शीरा प्रसाद बनाया जा रहा है। औसतन 38 से 40 हजार भक्त रोज़ यहां भोजन करते हैं। उनके लिए चावल और सब्जियां सोलर बॉयलर की भाप से पकाई जाती हैं। इसके अलावा, सब्जी में फोड़नी, चपाती, बूंदी और नाश्ते के पैकेट तैयार करने के लिए रोज़ाना करीब 1500 किलोग्राम गैस की आवश्यकता होती है।
रोज़ाना औसतन 500 से 600 किलोग्राम गैस की जरूरत
रेस्टोरेंट के अंदर वरन, पोली और शीरा बनाकर भक्तों को प्रसाद के रूप में परोसा जाता है। कुछ दिन पहले संस्थान को 18 टन गैस की आपूर्ति की गई थी, लेकिन केवल चपाती और बूंदी बनाने के लिए ही रोज़ाना औसतन 500 से 600 किलोग्राम गैस की जरूरत पड़ती है।
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गैस की कमी के कारण स्थिति सामान्य नहीं
गैस की कमी के कारण स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। ऐसे में नाश्ते के पैकेट में मिलने वाली पूड़ी-मटकी, भोजन में दी जाने वाली सब्जियां और मुफ्त में दी जाने वाली बूंदी फिलहाल चूल्हों पर ही तैयार की जा रही हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए संस्थान द्वारा रेस्टोरेंट के अंदर और कभी-कभी परिसर के बाहर बड़े बर्तनों में भोजन तैयार कर भक्तों को वितरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
