Sangram Jagtap Reaction Khamenei Death (डिजाइन फोटो)
Mumbai Muslim Protest Iran Leader: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के अहमदनगर से विधायक संग्राम जगताप ने इन प्रदर्शनों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शिया मुस्लिम समुदाय की भावनाओं पर सवाल उठाए हैं। जगताप ने मुंबई और मुंब्रा की सड़कों पर उतरे लोगों की आलोचना करते हुए इसे “अजीब और दुखद” करार दिया।
उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने उन पर बिना अध्ययन और जानकारी के टिप्पणी करने का आरोप लगाया है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
पथार्डी में आयोजित एक रैली के दौरान मीडिया से बात करते हुए संग्राम जगताप ने प्रदर्शनकारियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “आजकल किसी का देहांत विदेश में होता है, जिससे इनका कोई लेना-देना नहीं होता। न ये कभी उससे मिले, न कभी उसकी शादी में गए, फिर भी ये लोग इतने गहरे दुख में डूबे हैं।” जगताप ने आगे कहा कि यह देखना दर्दनाक है कि जब भारतीय सैनिक शहीद होते हैं या देश पर आतंकी हमला होता है, तब ये लोग सड़कों पर नहीं उतरते, लेकिन विदेशी नेता के लिए आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
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विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने संग्राम जगताप को उनके बयान के लिए आड़े हाथों लिया है। चर्चा इस बात की है कि प्रतिक्रिया देते समय विधायक जगताप ईरान के सर्वोच्च नेता का नाम तक ठीक से नहीं ले पा रहे थे। जानकारों का कहना है कि उन्होंने इस संवेदनशील धार्मिक और कूटनीतिक मुद्दे का अध्ययन किए बिना ही टिप्पणी कर दी। विपक्ष ने सवाल उठाया कि एक जिम्मेदार विधायक को अंतरराष्ट्रीय संबंधों और धार्मिक भावनाओं की संवेदनशीलता को समझना चाहिए था।
जगताप के बयान के विपरीत, राकांपा (शरद चंद्र पवार गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने भारत और ईरान के पुराने ऐतिहासिक संबंधों की याद दिलाई। आव्हाड ने एक वाक्य में पलटवार करते हुए कहा, “आजादी के बाद जब भारत को तेल की सख्त जरूरत थी, तब ईरान ने ही हमें बहुत सस्ते दामों पर तेल उपलब्ध कराया था।” उन्होंने संकेत दिया कि भारत के रणनीतिक हितों में ईरान का हमेशा बड़ा योगदान रहा है, इसलिए वहां के नेता के प्रति सम्मान व्यक्त करना केवल धार्मिक नहीं बल्कि कूटनीतिक और ऐतिहासिक भी है।