Prajakt Tanpure Statement (फोटो क्रेडिट-X)
Prajakt Tanpure Rahuri Bypoll: महाराष्ट्र की राहुरी विधानसभा उपचुनाव की सरगर्मी के बीच पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे के एक ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में ‘बम’ फोड़ दिया है।
जहाँ एक ओर महायुति (भाजपा) के उम्मीदवार अक्षय करदिले का प्रचार अभियान चरम पर है, वहीं चुनाव से दूरी बनाने वाले तनपुरे ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने अभी तक महाविकास अघाड़ी (MVA) का साथ नहीं छोड़ा है। उनके इस दावे ने भाजपा खेमे में भारी बेचैनी और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
सोशल मीडिया पर दिए एक साक्षात्कार में प्राजक्त तनपुरे ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, “मैंने महाविकास अघाड़ी को अलविदा नहीं कहा है और न ही मैं भाजपा में शामिल हुआ हूँ। अगर सरकार में बैठे लोगों ने मेरे क्षेत्र की समस्याओं को हल करने का वादा किया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि अघाड़ी कमजोर हो गई है।” तनपुरे के इस बयान ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि वे परोक्ष रूप से सत्तापक्ष की मदद कर रहे हैं।
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तनपुरे ने अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे 2029 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव हुए अभी डेढ़ साल ही हुए हैं और साढ़े तीन साल बाकी हैं, हम 2029 में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनाने के लिए संघर्ष करेंगे। उनके अनुसार, वर्तमान उपचुनाव में महायुति के दावों के विपरीत अघाड़ी कहीं से भी कमजोर नहीं है।
भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी की थी कि अगर तनपुरे चुनाव लड़ते भी तो वे अक्षय करदिले से हार जाते। इस पर तनपुरे ने तीखा पलटवार करते हुए इसे “बचकानी सोच” करार दिया। उन्होंने खुलासा किया कि जब उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया, तो भाजपा के ही कई बड़े नेताओं ने उन्हें फोन कर धन्यवाद दिया था। तनपुरे ने कहा, “मेरी ताकत क्या है, यह मुझे और मेरे पीछे खड़े लोगों को अच्छी तरह पता है। कुछ बचकाने लोगों की ठंडी टिप्पणियों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
प्राजक्त तनपुरे के इस ‘यू-टर्न’ जैसे बयान ने राहुरी उपचुनाव के चुनावी समीकरणों को उलझा दिया है। भाजपा के पदाधिकारियों ने अपने वरिष्ठ नेताओं को सूचित किया है कि तनपुरे के इस रुख का सीधा असर पार्टी को मिलने वाले वोटों पर पड़ सकता है, विशेषकर उन मतदाताओं के बीच जो अभी भी तनपुरे के प्रभाव में हैं।