‘प्रोजेक्ट गरुड़’ का बड़ा रिकॉर्ड, राहुरी के संस्कार मेटकर ने बनाया भारत का सबसे बड़ा रिमोट कंट्रोल UAV
Project Garuda News: महाराष्ट्र के राहुरी के स्टूडेंट संस्कार मेटकर और उनकी टीम ने 'प्रोजेक्ट गरुड़' के तहत भारत का सबसे बड़ा रिमोट कंट्रोल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट (UAV) बनाया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Electric UAV (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Ahilyanagar News: संस्कार मेटकर ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इंटरनेशनल लेवल पर राहुरी के सिर पर एक और ताज जोड़ दिया है। पुणे की MIT यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे संस्कार मेटकर और उनकी टीम ने भारत का सबसे बड़ा रिमोट से कंट्रोल होने वाला अनमैन्ड माइक्रो एयरक्राफ्ट (UAV) बनाया है। ‘प्रोजेक्ट गरुड़’ के तहत बने इस स्टेट-ऑफ-द-आर्ट एयरक्राफ्ट को ‘इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ दोनों इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ने दर्ज किया है।
संस्कार की इस कामयाबी के लिए राहुरी के लोग उनकी तारीफ़ कर रहे हैं। संस्कार, महात्मा फुले एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कॉलेज, राहुरी के प्रोफ़ेसर जितेंद्र मेटकर और नासिक के चैरिटी कमिश्नर डिपार्टमेंट में चैरिटी इंस्पेक्टर रोहिणी मेटकर के सबसे बड़े बेटे हैं। उनकी इस ज़बरदस्त कामयाबी की वजह से राहुरी शहर और पूरे तालुका का नाम एशिया महाद्वीप में मशहूर हो गया है। इस एयरक्राफ्ट को कैप्टन सतीश काचे, राहुरी के संस्कार मेटकर और पुणे के लोणी कालभोर में MIT आर्ट, डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की रितुजा यादव ने बनाया है। यह न सिर्फ़ भारत में बल्कि एशिया में भी अपनी तरह का पहला एयरक्राफ्ट है।
वज़न और कैपेसिटी
‘गरुड़’ नाम के इस रेडियो-कंट्रोल्ड इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट का वज़न 261 kg है। यह एयरक्राफ्ट 100 kg वज़न के साथ 100 मीटर की ऊंचाई पर 80 kmph की स्पीड से आसानी से उड़ सकता है। 200 मीटर की ऊंचाई से टेक ऑफ करने और ज़मीन पर सुरक्षित रूप से लैंड करने का टेस्ट धुले में सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह टेक्नोलॉजी भविष्य में एयर एम्बुलेंस, एयर टैक्सी और ड्राइवरलेस एडवांस्ड हवाई यात्रा के लिए बहुत फायदेमंद होगी।
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यूनिवर्सिटी ने दिए थे 48 लाख रुपये
MIT यूनिवर्सिटी ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए 48 लाख रुपये दिए थे। इस एयरक्राफ्ट के लिए कुछ सामान देश के बाहर से भी मंगवाया गया था। एयरक्राफ्ट को टेस्टिंग के लिए एक खास ट्रक में धुले ले जाया गया था।
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चार साल की मेहनत का नतीजा
संस्कार मेटकर और ऋतुजा यादव ने कहा, कि चार साल पहले, हमने ‘प्रोजेक्ट गरुड़‘ के कॉन्सेप्ट के बारे में सोचा था। हमने इंजीनियरिंग के पहले साल से ही इस छोटे एयरक्राफ्ट को बनाने की कोशिश शुरू कर दी थी। “सिर्फ अपने कॉन्फिडेंस से ही हम भारत का पहला इलेक्ट्रॉनिक रेडियो कंट्रोल एयरक्राफ्ट बना पाए।”
वाइस-चांसलर ने सेरेमनी की; राहुरी ने मनाया जश्न
यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और वाइस-चांसलर डॉ. मंगेशजी कराड ने स्टूडेंट्स की इस बड़ी कामयाबी के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने संस्कार मेटकर के लिए एक सेरेमनी की और उनकी खास तारीफ की और उनके आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। राहुरी के बेटे की इस ग्लोबल सफलता से एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी कैंपस और राहुरी शहर में खुशी का माहौल है।
