अन्ना हजारे ने छात्रों के समर्थन में किया 2 घंटे का मौन आंदोलन, PM मोदी को लिखा पत्र, देखें VIDEO

Anna Hazare Silent Protest: दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में 2 घंटे का मौन आंदोलन किया। इससे पहले उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखा।
Anna Hazare silent protest in Ahilyanagar in support of students
अहिल्यानगर में मौन आंदोलन करते अन्ना हजारे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Anna Hazare Silent Protest In Ahilyanagar: दिल्ली में विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के हक में अब देश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भी मैदान में उतर आए हैं। गुरुवार को अन्ना हजारे ने छात्रों पर हो रही कार्रवाई और हिंसा पर अपनी गहरी चिंता और नाराजगी जताते हुए महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में 2 घंटे का मौन आंदोलन किया।

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली में चल रहे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में अहिल्यानगर के वाडिया पार्क स्थित गांधी स्मारक पर एक मौन विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। बीमार होने के बावजूद, हजारे छात्रों को अपना नैतिक समर्थन देने के लिए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से कुछ ही देर बाद वहां से चले गए। छात्रों के साथ एकजुटता ज़ाहिर करते हुए वे भावुक भी हो गए। उनके जाने के बाद भी मौन विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

दो घंटे चला अन्ना हजारे का मौन आंदोलन

अन्ना हजारे के सहयोगी दत्ता आवारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अन्ना हजारे ने सुबह 11:00 बजे अपना मौन विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, जो दोपहर 1:00 बजे तक जारी रहा। यह मौन प्रदर्शन अहिल्यानगर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष आयोजित किया गया। आंदोलन की समाप्ति के बाद अन्ना हजारे इसी जिले में स्थित अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए।

अन्ना हजारे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

मौन आंदोलन से एक दिन पहले बुधवार को अन्ना हजारे ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने छात्रों पर हो रहे पुलिस बल प्रयोग और हिंसा की घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया। अन्ना हजारे पत्र लिखा था कि हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं। प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार को एक कड़ा और कूटनीतिक सुझाव भी दिया। उन्होंने लिखा कि अगर इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने को कहा जाता है, तो इससे केंद्र सरकार नहीं गिर जाएगी। इसके विपरीत, इस कदम से जनता के बीच सरकार की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी साबित होगी। साथ ही उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, विश्वास का माहौल बनाने और सकारात्मक संवाद के जरिये समाधान तलाशने का अनुरोध किया।

नीट विवाद को लेकर चल रहा आंदोलन

बता दें कि नीट विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेत‍ृत्व में पिछले कई दिनों से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन चल रह था। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे हैं। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों ने संसद तक मार्च निकाला। आंदोलन उग्र होने के बाद पुलिस ने बल प्रयोग भी किया। इस पूरे विवाद को लेकर सरकार को काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

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