

Anna Hazare's Statement: आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता राघव चड्ढा और उनके साथ अन्य राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की खबरों ने देशभर में राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। इस बड़े दलबदल पर अब प्रसिद्ध समाजसेवक अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया सामने आई है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे ने नेताओं के इस आचरण को 'अनैतिक' और 'स्वार्थ प्रेरित' करार दिया है।
अहिल्यानगर के राळेगण सिद्धी में मीडिया से बात करते हुए अन्ना हजारे ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि"अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल बदलना सही बात नहीं है। यह हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।"
अन्ना हजारे ने इस दलबदल को संवैधानिक ढांचे के संदर्भ में देखते हुए कहा कि हमारे संविधान में ऐसी स्वार्थपूर्ण राजनीति का उल्लेख नहीं है। उन्होंने नेताओं को याद दिलाया कि कि देश की व्यवस्था और लोकतंत्र का आधार हमारा संविधान है। जब नेता केवल अपनी सत्ता की लालसा या सुरक्षा के लिए दल बदलते हैं, तो वे संविधान की मूल भावना का अनादर करते हैं।अन्ना के अनुसार, देश संविधान के अनुसार चलता है और जनप्रतिनिधियों का आचरण संवैधानिक मर्यादा के भीतर होना चाहिए।
गौरतलब है कि राघव चड्ढा कभी उसी 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन का हिस्सा रहे थे, जिसकी शुरुआत अन्ना हजारे ने की थी। ऐसे में अन्ना का यह बयान उन नेताओं के लिए एक बड़ा नैतिक झटका माना जा रहा है जो पाला बदलकर सत्ताधारी दल के साथ जा रहे हैं। अन्ना हजारे ने पहले भी कई बार 'दलबदल कानून' और राजनीतिक शुचिता की बात की है। उनका मानना है कि जब कोई नेता पार्टी बदलता है, तो वह उन मतदाताओं के साथ भी विश्वासघात करता है जिन्होंने उसे एक विशेष विचारधारा या दल के नाम पर चुना था।
अहिल्यानगर से आई अन्ना हजारे की यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक माहौल में 'नैतिकता बनाम सत्ता' की बहस को और तेज कर सकती है। जहां बीजेपी इसे अपने बढ़ते कुनबे के रूप में देख रही है, वहीं अन्ना जैसे मार्गदर्शक इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास मान रहे हैं।