

Anna Hazare Hunger Strike: सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के नए नियमों को लेकर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रालेगन सिद्धि से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर यह है कि आज राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे और अन्ना हजारे के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही है। नियमों में बदलाव के खिलाफ अन्ना हजारे का आक्रामक रुख बरकरार है और उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 5 जुलाई से आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठेंगे।
इस गतिरोध को तोड़ने और अन्ना हजारे को आंदोलन से पीछे हटाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। ऐसे में अन्ना का अनशन तय माना जा रहा है।
अन्ना हजारे का मुख्य विरोध आरटीआई (RTI) के तहत हाल ही में लागू किए गए कुछ नए और कड़े प्रावधानों को लेकर है। उन्होंने सरकार द्वारा आरटीआई आवेदनों के लिए शुल्क में की गई बढ़ोतरी, आवेदकों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य करने और सबसे महत्वपूर्ण, आवेदन दाखिल करने के लिए "एक विषय, एक आवेदन" के नियम का कड़ा विरोध किया है। अन्ना हजारे का मानना है कि इन नए नियमों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला यह ऐतिहासिक कानून बेहद कमजोर हो जाएगा और आम नागरिकों के लिए सूचना हासिल करना बेहद जटिल हो जाएगा। इसी आक्रोश के चलते उन्होंने सरकार को आरटीआई के बदले हुए नियमों को तुरंत वापस लेने की चेतावनी दी है।
रालेगन सिद्धि में आज हुई बैठक के बाद मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे नियमों और आपत्तियों को लेकर चर्चा करने आए थे, लेकिन आंदोलन को लेकर अंतिम फैसला पूरी तरह सरकार और अन्ना हजारे के बीच ही होना है। बैठक में कोई संतोषजनक हल न निकलने के कारण 5 जुलाई से होने वाली भूख हड़ताल का खतरा सरकार पर जस का तस मंडरा रहा है। इस बीच, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्ना हजारे के बीच जल्द ही एक और दौर की बैठक होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उम्मीद है कि आंदोलन की नौबत आने से पहले कोई बीच का रास्ता निकाला जा सकेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्ना हजारे ने इस पूरे विवाद पर सीधे दखल देने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने सरकार द्वारा थोपे गए नए आरटीआई नियमों को जनविरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। 'मातोश्री' और शिवसेना के सांसदों की बगावत के बीच अब रालेगन सिद्धि से उठने वाली इस नई जन-आंदोलन की गूंज ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री इस पत्र पर क्या एक्शन लेते हैं और क्या 5 जुलाई से पहले अन्ना हजारे को मनाने में सरकार कामयाब हो पाती है या नहीं।