कुंभ मेले से पहले ही विवादः 24000 करोड़ की योजना लटकी,भीमाशंकर के लिए 288 करोड़ की योजना को मंजूरी
Nashik News: कुंभ मेला नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में होने के बावजूद, सरकार ने पुणे जिले के भीमाशंकर मंदिर के लिए 288 करोड़ की विकास योजना को मंजूरी दी है।
- Written By: आंचल लोखंडे
कुंभ मेले से पहले ही विवादः (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nashik News: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले ने नासिक में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कुंभ मेला नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने के बावजूद, सरकार ने पुणे जिले के भीमाशंकर मंदिर के लिए 288 करोड़ की विकास योजना को मंजूरी दी है। इस कदम से स्थानीय लोगों और नेताओं में यह आरोप लग रहे हैं कि कुंभ की तैयारी अब धार्मिक कम और राजनीतिक ज्यादा हो गई है।
सरकार के इस फैसले के पीछे, अधिकारियों का तर्क है कि भीमाशंकर को मिला फंड कुंभ मेले के दौरान आने वाली अतिरिक्त भीड़ को संभालने के लिए है, लेकिन नासिक के लोग इसे एक बहाना मान रहे हैं। पुणे जिलाधिकारी कार्यालय ने जो प्रस्ताव भेजा था, उसमें 288 करोड़ की इस योजना में कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें भक्त सुविधा केंद्र, बस स्टैंड का विकास, मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार, नई सड़कों का निर्माण और रोप-वे जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
भीड़ प्रबंधन के नाम पर फंड का खेल
इन प्रोजेक्ट्स का मकसद भीमाशंकर में तीर्थयात्रियों की संख्या को बढ़ाना और उन्हें बेहतर सुविधाएं देना है, जिसका सीधा संबंध नासिक के कुंभ मेले से नहीं दिखता। दूसरी ओर, नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियां पिछले दो साल से चल रही हैं। कुंभ प्राधिकरण ने नासिक मनपा और अन्य विभागों से कुल 24,000 करोड़ रुपए की एक व्यापक विकास योजना सरकार को मंजूरी के लिए भेजी है। इस योजना में शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सड़कों की
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मरम्मत, पानी की आपूर्ति, सीवेज सिस्टम
और अन्य जरूरी काम शामिल हैं। लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है, जिसके कारण ये सभी योजनाएं लटकी हुई हैं। राज्य विधानमंडल के सत्र में 1004 करोड़ की अनुपूरक मांगों को तो मंजूरी मिली, लेकिन कुंभ मेले की मुख्य योजना को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।
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नाशिक के साथ ‘अन्या और राजनीतिक तनाव
कुंभ मेले से सीधे तौर पर संबंधित न होने वान भीमाशंकर को फंड मिलने से नासिक के लोगों में गुस्सा है। उनका मानना है कि सरकार की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और यह फैसला नासिक के साथ एक तरह का अन्याय है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि नासिक को फंड क्यों नहीं मिल रहा, जबकि कुंभ यहीं होना है। इस मुद्दे को लेकर नासिक में जल्द ही एक नया राजनीतिक विवाद छिड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में और भी गरमा सकता है।
