घने जंगल में 12 किमी की पैदल यात्रा; हाथियों की गश्त के बीच भक्त जन्माष्टमी पर करेंगे कान्हा के दर्शन

Krishna Darshan In Bandhavgarh: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में साल में सिर्फ एक बार खुलता है भगवान कृष्ण-बलदाऊ दर्शन का मार्ग, जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं ने तय करेंगे 12 किमी का कठिन पैदल सफर।
devotees walk 12 km through dense forest for Krishna darshan in Bandhavgarh
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में साल में एक बार खुलता है मंदिर(सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
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Bandhavgarh Janmashtami Celebration: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला रेंज क्षेत्र में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण और बलदाऊ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की अखियां साल भर से दर्शन को बेताब रहती है। साल में केवल एक ही दिन जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं को जंगल के भीतर करीब 12 किलोमीटर का पैदल सफर आने और जाने में करना पड़ता है। मार्ग की साफ सफाई से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी वनविभाग कई वर्षों से बखूबी निभाते आ रहा हैं । ताला से मंदिर की दूरी पहाड़ी में लगभग 6 किलोमीटर है। श्रद्धालु 6 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचते हैं और दर्शन के बाद वापस 6 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर ताला लौटते हैं।

ताला रेंज के रेंजर राहुल किरार के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान कृष्ण और बलदाऊ के दर्शन के लिए इस पैदल मार्ग से मंदिर पहुंचते हैं। वन क्षेत्र होने के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर वन विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

हर 100 से 150 मीटर पर जवानों की तैनाती

रेंजर राहुल किरार ने बताया कि ताला से मंदिर के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लगभग हर 100 से 150 मीटर की दूरी पर वन विभाग और पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था में वन विभाग के करीब 170 कर्मचारी और पुलिस के लगभग 150 जवान ड्यूटी पर रहते हैं।इसके अलावा कैंप एलीफेंट के महावतों के साथ 3 से 4 हाथियों को भी गश्त में लगाया जाता है। वन क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती है।

तीन स्थानों पर मेडिकल और एसडीआरएफ टीम भी तैनात

श्रद्धालुओं की सुविधा और आपात स्थिति से निपटने के लिए मार्ग में तीन प्वाइंट पर मेडिकल टीम तैनात रहती है। इसके साथ ही राजस्व अमला और एसडीआरएफ टीम भी सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद रहती है। रेंजर के मुताबिक, जन्माष्टमी के दौरान वर्षों से श्रद्धालु इस मार्ग से भगवान कृष्ण और बलदाऊ के दर्शन के लिए पहुंचते आ रहे हैं। अब तक इतने वर्षों में वन्यजीवों द्वारा श्रद्धालुओं पर किसी हमले की घटना सामने नहीं आई है।

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आस्था के साथ सुरक्षा का भी विशेष ध्यान

बांधवगढ़ के जंगलों के बीच स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पैदल मार्ग तय करना पड़ता है, लेकिन भगवान के दर्शन की आस्था उन्हें यह दूरी तय करने का उत्साह देती है। प्रशासन और वन विभाग की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने से श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जाता है।

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