धार्मिक स्थलों के व्यवसायीकरण पर भड़के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी, कहा – ‘धर्म के नाम पर भ्रष्टाचार बंद हो’
Ujjain News : उज्जैन के जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज ने महाकाल सहित धार्मिक स्थलों पर बढ़ती व्यावसायिकता और वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाते हुए शासन-प्रशासन को चेतावनी दी।
- Reported By: अजय नीमा | Edited By: प्रीतेश जैन
महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज (फोटो सोर्स- नवभारत)
Mahamandaleshwar Shaileshanand Giri Statement: जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरी महाराज ने धार्मिक स्थलों पर बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों और वीआईपी संस्कृति को लेकर शासन-प्रशासन पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने महाकाल मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन, आरती और विभिन्न धार्मिक व्यवस्थाओं के नाम पर लिए जा रहे शुल्क पर सवाल उठाते हुए इसे सनातन परंपरा के विपरीत बताया।
महामंडलेश्वर ने कहा कि सनातन धर्म में ईश्वर के दर्शन किसी वर्ग विशेष तक सीमित नहीं हैं। दर्शन और पूजा-अर्चना को शुल्क आधारित व्यवस्था से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में स्पष्ट उल्लेख है कि देवताओं के द्रव्य का अनुचित उपयोग या हरण करने वाला व्यक्ति महापाप का भागी बनता है। इसलिए धर्मस्थलों को आय का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
बढ़ रही VIP संस्कृति और व्यावसायिकता
स्वामी शैलेशानंद गिरी ने कहा कि आज कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर वीआईपी संस्कृति और व्यावसायिकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर मां बगलामुखी मंदिर तक दर्शन और आरती के नाम पर शुल्क लेने की व्यवस्था की आलोचना की। उनका कहना था कि इससे आम श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था प्रभावित होती है।
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धार्मिक पर्यटन शब्द पर भी आपत्ति
उन्होंने ‘धार्मिक पर्यटन’ शब्द पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में इसका कोई स्थान नहीं है। उनके अनुसार भारतीय परंपरा में तीर्थाटन और देशाटन की परंपरा रही है, जिसका उद्देश्य साधना, आत्मचिंतन और ज्ञान प्राप्त करना होता है, न कि केवल पर्यटन करना। उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि जो स्थान कभी ऋषि दुर्वासा की तपोभूमि माना जाता था, आज पर्यटन की अंधी दौड़ में उसकी मूल धार्मिक पहचान प्रभावित हुई है।
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शासन से की अपील
महामंडलेश्वर ने शासन और प्रशासन से अपील की कि धार्मिक स्थलों पर बढ़ रही व्यावसायिक प्रवृत्तियों और कथित अनियमितताओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया और जनता में असंतोष बढ़ा तो हालात संभालना कठिन हो सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की पवित्रता और सनातन परंपराओं की गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
