2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ हाईवे ब्रिज का 500 मीटर हिस्सा धंसा; NHAI ने दोबारा निर्माण के दिए निर्देश

उज्जैन-गरोठ हाईवे के 500 मीटर हिस्से में दूसरी बार धंसाव और दरारें आईं। NHAI ने प्रभावित हिस्सा तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। दिसंबर तक यातायात शुरू करने का दावा है।
500 metre section of Ujjain Garoth Highway bridge sinks
उज्जैन-गरोठ हाईवे ब्रिज का 500 मीटर हिस्सा धंसा(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Ujjain Garoth Highway Bridge Damaged: करीब 2,600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाईवे के देवास रोड ब्रिज से रेलवे पटरी के बीच करीब 500 मीटर हिस्से में धंसाव और दरारों की स्थिति सामने आई है। खास बात यह है कि यातायात शुरू होने से पहले ही इस हिस्से में दूसरी बार समस्या सामने आई है। मामले के बाद एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी को प्रभावित हिस्से को सुधारने के साथ जरूरत पड़ने पर तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए हैं।

प्रेमनगर-चंदेसरी क्षेत्र में बन रहे गरोठ रोड ब्रिज के भराव वाले हिस्से में पानी का रिसाव और धंसाव दिखाई देने के बाद स्थानीय स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। इसी के साथ सोशल मीडिया पर ब्रिज के धंसने का वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ। हालांकि अधिकारियों और निर्माण एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि पूरा ब्रिज नहीं गिरा है। समस्या ब्रिज के भराव और निर्माणाधीन हिस्से में सामने आई है, जहां तकनीकी सुधार का काम किया जा रहा है।

एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी को दिए सख्त निर्देश

मामला सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी को सख्त निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित हिस्से को हाईवे के हैंडओवर से पहले निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा। जरूरत के अनुसार खराब हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण किया जाएगा। परियोजना की गुणवत्ता की निगरानी के लिए एनएचएआई की टेक्निकल टीम के साथ जांच एजेंसियों की टीमें भी मौके और निर्माण कार्य पर नजर रख रही हैं।

वायरल वीडियो पर कंपनी ने दिया स्पष्टीकरण

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण यह चर्चा फैल गई कि प्रेमनगर के पास बन रहा ब्रिज गिर गया है। जीएचवी कंपनी के सीनियर इंजीनियर अमित राय ने इस दावे को गलत बताया है। उनका कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई गई जगह यहां की नहीं है या किसी अन्य स्थान का वीडियो है। उन्होंने बताया कि प्रेमनगर-चंदेसरी क्षेत्र में निर्माणाधीन हिस्से में तकनीकी मानकों के अनुसार रैंप और अन्य कार्य किए जा रहे हैं। प्रभावित हिस्से की मरम्मत और पुनर्निर्माण भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

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दिसंबर तक ट्रैफिक शुरू करने का दावा

निर्माण एजेंसी के सीनियर इंजीनियर अमित राय के अनुसार परियोजना के इस हिस्से में काम में देरी की वजह रेलवे से जुड़ी अनुमतियां और तकनीकी औपचारिकताएं भी हैं। एजेंसी ने दावा किया है कि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और दिसंबर तक हाईवे पर यातायात पूरी तरह शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। 136 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग से उज्जैन और गरोठ के बीच आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल दूसरी बार सामने आए धंसाव ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि दोबारा तैयार किए जाने के बाद प्रभावित हिस्सा कितना मजबूत और सुरक्षित साबित होता है।

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