उज्जैन के गजलक्ष्मी मंदिर में अनोखी सजावट, 40 लाख रुपए के नोटों से सजा गर्भगृह, 501 लीटर दूध से हुआ अभिषेक

Gajalakshmi Temple Ujjain: धनतेरस पर उज्जैन के प्राचीन मां गजलक्ष्मी मंदिर को 40 लाख रुपए के नोटों से सजाया गया। 501 लीटर दूध से अभिषेक हुआ। भक्तों को कौड़ी और पीले चावल बांटे गए।
Ujjain Gajalakshmi Temple Money Decoration
गजलक्ष्मी मंदिर को 40 लाख रुपए के नोटों से सजाया(सोर्स- सोशल मीडिया)
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HIGHLIGHTS:

  • धनतेरस पर उज्जैन के मां गजलक्ष्मी मंदिर को 40 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया।

  • मंदिर के गर्भगृह और परिसर में 500, 200 और 100 रुपये के नोट लगाए गए।

  • मां गजलक्ष्मी का 501 लीटर दूध से पंचामृत अभिषेक किया गया।

  • श्रद्धालुओं ने कमल के फूल और दूध अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

Ujjain Gajalakshmi Temple Money Decoration: धनतेरस के अवसर पर उज्जैन के नई पेठ स्थित प्राचीन मां गजलक्ष्मी मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। इस बार मंदिर का गर्भगृह और परिसर करीब 40 लाख रुपए के नोटों से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शुक्रवार सुबह से ही मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। शुभ अवसर पर मां गजलक्ष्मी का पंचामृत अभिषेक किया गया। इस दौरान 501 लीटर दूध से माता का अभिषेक कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। श्रद्धालु अपने साथ दूध और कमल के फूल लेकर पहुंचे और मां के चरणों में अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

धनतेरस पर मंदिर की सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र रही। रतलाम के प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर उज्जैन के गजलक्ष्मी मंदिर को भी भारतीय मुद्रा के नोटों से सजाया गया है। मंदिर के गर्भगृह और परिसर में करीब 40 लाख रुपए के नोट लगाए गए हैं। इसमें 500, 200 और 100 रुपए के नोट शामिल हैं। मंदिर से जुड़े करीब 100 लोगों ने मिलकर सजावट के लिए नोट एकत्रित किए। सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में गार्ड तैनात किए गए हैं और निगरानी के लिए 6 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।

भक्तों को बांटी गई कौड़ी और पीले चावल

उज्जैन शहर के इस मंदिर के पुजारी पंडित अवधेश शर्मा ने बताया कि धनतेरस पर मां गजलक्ष्मी के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व है। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूध और कमल के फूल लेकर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने माता को अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और धन-वैभव की कामना की। पूजन के बाद मंदिर समिति की ओर से भक्तों को कौड़ी और पीले चावल वितरित किए गए। मान्यता है कि इन वस्तुओं को घर में रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और परिवार में धन-धान्य एवं वैभव का आगमन होता है।

करीब 2 हजार साल पुराना बताया जाता है मंदिर

पंडित अवधेश शर्मा के अनुसार नई पेठ स्थित मां गजलक्ष्मी का मंदिर करीब 2 हजार साल पुराना माना जाता है। यहां स्थापित माता की प्रतिमा एक ही पाषाण पर निर्मित है। इसे सम्राट विक्रमादित्य के काल का बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सम्राट विक्रमादित्य मां गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी मानकर नियमित रूप से पूजन करते थे। इसी वजह से इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी काफी अधिक माना जाता है। धनतेरस और दीपावली के अवसर पर यहां विशेष रूप से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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ऐरावत हाथी पर विराजमान हैं मां गजलक्ष्मी

मंदिर में स्थापित मां गजलक्ष्मी की प्रतिमा बेहद खास है। इसमें माता ऐरावत हाथी पर पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं। मंदिर में मां गजलक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा भी स्थापित है। धनतेरस के अवसर पर मंदिर के प्रवेश द्वार को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार धनतेरस से लेकर दीपावली त्योहार के पड़वा तक मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहेंगे। इस दौरान भक्त मां गजलक्ष्मी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। नोटों से सजे मंदिर और विशेष अभिषेक को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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