EXCLUSIVE: अयोध्या में दान पर सियासत, उज्जैन महाकाल मंदिर में पारदर्शिता की मिसाल; पढ़ें यह खास रिपोर्ट
Navbharat Exclusive: राम मंदिर सियासत के बीच महाकाल मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता, वित्तीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड दान, कांच के कमरे और बिना जेब के कपड़ों में नोटों की गिनती।
- Reported By: अजय नीमा | Edited By: सजल रघुवंशी
महाकाल दान रिपोर्ट (सोर्स- नवभारत लाइव)
Mahakal Temple Donation Transperancy: अयोध्या के राम मंदिर में दान को लेकर जहां एक तरफ सियासत गरमाई हुई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से पारदर्शिता की एक बड़ी मिसाल सामने आई है।
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में सालभर लाखों-करोड़ों श्रद्धालु शीश नवाते हैं और दिल खोलकर दान करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चढ़ावे के इस महा-संग्रह की सुरक्षा और गिनती कैसे होती है? मंदिर समिति का दावा है कि यहाँ दान की पाई-पाई का हिसाब पूरी तरह पारदर्शी है।
कड़ी निगरानी के बीच होती है दान की गिनती
मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया के मुताबिक, महाकाल मंदिर में दान पेटियां समय-समय पर सख्त सुरक्षा के बीच खोली जाती हैं। काउंटिंग रूम पूरी तरह से पारदर्शी और कांच का बना है, जिसे बाहर से कोई भी देख सकता है। यहां तैनात कर्मचारियों की जेबें सील होती हैं, यानी उनके कपड़ों में पॉकेट नहीं होती। बैंक अधिकारियों और मंदिर प्रशासन की मौजूदगी में, सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी के बीच नोटों की गिनती की जाती है। यही नहीं, श्रद्धालुओं से मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों को तत्काल नापकर सीलबंद किया जाता है और इसकी रसीद दी जाती है, जिसके बाद इसे सीधे स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रख दिया जाता है।
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डाक से लेर ऑनलाइन माध्यम से आता है दान
मंदिर में कैश, ऑनलाइन, क्यूआर कोड और डाक हर माध्यम से दान आता है। काउंटिंग रूम में पूरी सिक्योरिटी रहती है। ड्यूटी पर आने-जाने वाले हर कर्मचारी और बैंक कर्मी की चेकिंग होती है। उनके पॉकेट्स सील रहते हैं। सब कुछ कैमरे और एक पारदर्शी कांच के कमरे में होता है। आभूषणों को तत्काल नापकर सीलबंद किया जाता है और समय-समय पर इन्हें री-वैल्यू भी किया जाता है।
आशीष फलवाडिया (महाकाल मंदिर सहायक प्रशासक)
वर्ष 2025-26 में आया इतना दान
पारदर्शिता के इन पुख्ता दावों के बीच, वर्ष 2025-26 में बाबा महाकाल के खजाने में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई है। मंदिर को मिले कुल दान और आय के आंकड़े हैरान करने वाले हैं:
- दान पेटी से नगद राशि: 62 करोड़ रुपये से अधिक
- नगद काउंटर दान: 5 करोड़ 50 लाख रुपये
- ऑनलाइन दान: 3 करोड़ 60 लाख रुपये
- अन्नक्षेत्र दान: 3 करोड़ 38 लाख रुपये
- गुप्त दान: 4 करोड़ 65 लाख रुपये
- मनी ऑर्डर: 1 लाख 23 हजार रुपये
- लड्डू प्रसाद से आय: 65 करोड़ रुपये से अधिक
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महाकाल मंदिर की कुल आय 150 करोड़ से ज्यादा
इस पूरी राशी में 250 वाली शीघ्रधर्षण व्यवस्था भी शामिल है। इसके अलावा करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण भी बाबा के दरबार में अर्पित किए गए हैं। लड्डू प्रसाद, शीघ्र दर्शन और सोने-चांदी समेत अगर महाकाल मंदिर की कुल आय की गणना की जाए, तो यह आंकड़ा 150 करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंच चुका है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण मंदिर की आय में यह बंपर उछाल आया है। सियासत के इस दौर में महाकाल मंदिर समिति का यह पारदर्शी सिस्टम वाकई देश के अन्य बड़े मंदिरों के लिए एक बेहतरीन नजीर पेश करता है।
