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Madhya Pradesh Wildlife Leader: जंगल में दौड़ने तैयार मादा चीता, टाइगर स्टेट से आगे MP बन रहा वाइल्डलाइफ लीडर

MP Wildlife Conservation: CM डॉ. मोहन यादव 10-11 मई को श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क वे बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से वन क्षेत्र में मुक्त करेंगे

  • Written By: सुधीर दंडोतिया
Updated On: May 10, 2026 | 01:30 PM

MP बन रहा 'वाइल्डलाइफ लीडर' : सोर्स सोशल मीडिया

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Madhya Pradesh Tiger State:  MP ने एक बार फिर साबित किया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संरक्षण के प्रति संवेदनशील नेतृत्व साथ आए तो वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बन सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य आज वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में प्रदेश देशभर के लिए एक मॉडल बनता दिखाई दे रहा है।

दिसंबर-2023 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण को केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं माना, बल्कि इसे सांस्कृतिक विरासत-जैव विविधता-पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा। यही कारण है कि बीते डेढ़ वर्षों में मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व निर्णय लिए गए।

रातापानी टाइगर रिजर्व को देश का 8वां और प्रदेश का नया टाइगर रिजर्व बना

सबसे बड़ा फैसला रातापानी टाइगर रिजर्व को देश का 8वां और प्रदेश का नया टाइगर रिजर्व घोषित करना रहा। वर्ष 2008 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी से अनुमति मिलने के बावजूद यह प्रस्ताव करीब 17 वर्षों तक लंबित रहा, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में इसे मंजूरी मिली। रातापानी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व है, जो किसी राज्य की राजधानी के सबसे करीब स्थित है।

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माधव टाइगर रिजर्व  मानव और वन्यजीव संघर्ष कम करने की पहल

मार्च-2025 में माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार का निर्माण केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की व्यावहारिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में संरक्षण की सबसे बड़ी चुनौती अब शिकार नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ता टकराव है। ऐसे में यह पहल भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम मानी जा रही है।

गिद्ध संरक्षण में देश का नेतृत्व

कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की वापसी में मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। आज राज्य में 14 हजार से अधिक वल्चर मौजूद हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक की लंबी उड़ान पूरी कर चुका है, जो इस संरक्षण अभियान की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है।

कूनो अब केवल चीता परियोजना नहीं, वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला

कूनो नेशनल पार्क में किए जा रहे कार्य आज पूरी दुनिया के संरक्षण वैज्ञानिकों की नजर में है। ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता के बाद यहां चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है।  इसके साथ ही गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी को चीतों के दूसरे आवास और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को तीसरे बड़े चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। नौरादेही में सॉफ्ट रिलीज बोमा निर्माण का भूमिपूजन इस परियोजना के अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है।

घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण पर फोकसनेशनल चंबल सेंचुरी दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा हाल ही में कूनो नदी में घड़ियाल और कछुए छोड़े गए, जबकि नर्मदा नदी में मगरमच्छों की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष पहल शुरू की गई है। ओंकारेश्वर क्षेत्र में मगरमच्छ छोड़े जाने को नर्मदा के इको-सिस्टम के दोबारा संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें: कूनो नेशनल पार्क में गूंजेगी किलकारी! CM मोहन यादव की गुड न्यूज- एक और मादा चीता प्रेग्नेंट

हाथी संरक्षण संघर्ष से सह-अस्तित्व की ओर

राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग, सोलर फेंसिंग और राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश अब केवल संकट के बाद प्रतिक्रिया देने की बजाय वैज्ञानिक और दीर्घकालिक प्रबंधन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। विशेष रूप से मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना वन्यजीव संरक्षण के प्रति सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में अहम निर्णय माना जा रहा है।इसके अलावा मध्यप्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली 5500 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर काम चल रहा है

Mp wildlife conservation project cheetah tiger reserve

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Published On: May 10, 2026 | 01:27 PM

Topics:  

  • Cheetah Project
  • Kuno National Park
  • Mohan Yadav
  • Tiger
  • Wildlife Sanctuary

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