

Himadri Singh Narendra Maravi Divorce : शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता कानूनी तौर पर खत्म हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम जिला न्यायालय ने दोनों की पारस्परिक सहमति के आधार पर 3 सितंबर 2026 को विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की। इसके साथ ही करीब 9 साल पुराना उनका वैवाहिक संबंध समाप्त हो गया।
हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का विवाह 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। 20 जून 2019 को दोनों की बेटी गिरिशा सिंह का जन्म हुआ। अदालत में पेश तथ्यों के मुताबिक शादी के बाद दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगे। इसके बाद 5 मई 2021 से दोनों अलग-अलग रहने लगे।
तलाक की याचिका में दोनों ने अदालत को बताया कि अब पति-पत्नी के रूप में साथ रहने की कोई संभावना नहीं है। खास बात यह है कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कोई विशेष आरोप नहीं लगाया। अदालत ने भी सुलह की कोशिश की और दोनों को रिश्ते पर पुनर्विचार के लिए छह महीने का समय दिया, लेकिन इस दौरान भी दोनों के बीच समझौता नहीं हो सका।
अदालत के समक्ष हुए समझौते के अनुसार बेटी गिरिशा सिंह अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ रहेगी। उसकी परवरिश, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के वैवाहिक खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह उठाएंगी। हिमाद्री सिंह ने अपने और बेटी के लिए नरेंद्र मरावी से किसी तरह के भरण-पोषण या गुजारा भत्ते की मांग नहीं की है। शादी के दौरान मिले उपहार और जेवरात को लेकर भी दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है।
छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद दोनों ने अदालत में स्पष्ट किया कि उनके बीच वैवाहिक संबंध बहाल होने की कोई संभावना नहीं है। इसके बाद राजेंद्रग्राम जिला न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत तलाक की डिक्री पारित कर दी। नरेंद्र मरावी ने मीडिया से कहा कि तलाक के लिए दोनों की आपसी सहमति थी और कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी आदेश की कॉपी नहीं देखी है। हिमाद्री सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
नरेंद्र सिंह मरावी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा से की थी और वे भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े रहे। 2009 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर शहडोल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस नेता और हिमाद्री सिंह की मां राजेश नंदिनी सिंह से हुआ था, जिसमें उन्हें हार मिली थी। जून 2018 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।