MP News: सीहोर की टांडा पंचायत में भाई-भतीजावाद, विकास का पैसा जनता के बजाय सरपंच के बेटों की तिजोरी में
Sarpanch Family Fraud: सीहोर की टांडा पंचायत में सरपंच-सचिव का महाघोटाला उजागर हुआ। बेटों के नाम फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये उड़ा लिए गए। कागजों में साफ नालियां लेकिन जमीन पर गंदगी।
- Reported By: विजेंद्र सिंह राणा | Edited By: सजल रघुवंशी
टांडा पंचायत में घोटाला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sehore Ashta Tanda Panchayat Corruption: सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही हो लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण आष्टा जनपद की ग्राम पंचायत टांडा में देखने को मिल रहा है। यहां विकास की राशि आम जनता के काम आने के बजाय सरपंच के परिवार की तिजोरियों में जा रही है।
ग्राम पंचायत टांडा में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार का खुला खेल चल रहा है। आरोप है कि सरपंच पद का दुरुपयोग करते हुए अपने सगे पुत्र और भतीजे को अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। गांव में विकास कार्यों के नाम पर कागजों में योजनाएं बनाई जा रही हैं और सरपंच के पुत्र व भतीजे के नाम से फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये की राशि धड़ल्ले से निकाली जा रही है।
कागजों में चमचमाती नालियां, जमीन पर गंदगी का अंबार
पंचायत के कारनामों की पोल तब खुलती है जब गांव की बदहाली सामने आती है। ग्राम पंचायत द्वारा नालियों की साफ-सफाई के नाम पर नियमित रूप से बिल लगाकर राशि आहरित की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि पूरे गांव में कचरे और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियां चोक हैं और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। सफाई के नाम पर सिर्फ सरकारी खजाने को साफ किया जा रहा है।
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जनसुनवाई से गायब जिम्मेदार, ताले में बंद रहती है पंचायत
शासन के नियमानुसार प्रत्येक मंगलवार को ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण के लिए पंचायत स्तर पर जनसुनवाई का आयोजन अनिवार्य है। लेकिन टांडा पंचायत की तानाशाही ऐसी है कि मंगलवार को भी पंचायत भवन का ताला तक नहीं खुलता। सरपंच और सचिव दोनों ही जनसुनवाई से नदारद रहते हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों की सहभागिता के लिए होने वाली ‘आम सभा’ और आवश्यक बैठकें भी महीनों से आयोजित नहीं की गई हैं, जिससे ग्रामीण अपनी बात रखने के लिए तरस रहे हैं।
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सीईओ से कार्रवाई की उम्मीद
सीहोर जिले की आष्टा जनपद पंचायत की टांडा ग्राम पंचायत में चल रहे इस खुले भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध कार्यों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) इस गंभीर मामले का संज्ञान लेंगे? क्या इस भ्रष्ट सरपंच-सचिव की जुगलबंदी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होगी या फिर जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई और रिकवरी की मांग की है।
