एनजीटी (NGT) के आदेशों का सीहोर में खुलेआम उल्लंघन, नर्मदा के सीने पर माफिया का तांडव, प्रशासन ‘मौन’
Narmada River Illegal Sand Mining:नर्मदा तट पर माफिया का कब्जा, एनजीटी रोक के बावजूद पोकलेन-जेसीबी से खुदाई जारी; जिम्मेदार खनिज विभाग की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल।
- Reported By: विजेंद्र सिंह राणा | Edited By: सुधीर दंडोतिया
एनजीटी रोक के बावजूद पोकलेन-जेसीबी से खुदाई जारी
Illegal Sand Mining In Sehore: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा नर्मदा नदी और उसके तटीय क्षेत्रों में रेत के उत्खनन पर सख्त पाबंदी के बावजूद, सीहोर जिले में रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं।
जिले के कई प्रमुख घाटों पर नियमों को ताक पर रखकर दिन-दहाड़े अवैध उत्खनन का काला खेल जारी है। और सबसे चिंताजनक बात यह है कि खनिज विभाग इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
मशीनों से चीरा जा रहा नदी का सीना
जिले के चोरसाखेड़ी, बाबरी और अंबा बड़गांव जैसे क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां बेखौफ संचालित हो रही हैं। चोरसाखेड़ी और अंबा बड़गांव में भारी-भरकम पोकलेन और जेसीबी मशीनों के जरिए दिन-दहाड़े धड़ल्ले से खुदाई की जा रही है, जिससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बाबरी और आसपास के घाटों पर पनडुब्बियों और कश्तियों के माध्यम से नदी की गहराई से अवैध रेत निकाली जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलीय पर्यावरण के लिए बेहद घातक है।
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क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के इंतजार में बैठा है। कुछ समय पहले बाबरी घाट पर अवैध उत्खनन के दौरान रेत माफिया के लोग नर्मदा की तेज धार में फंस गए थे, जिसमें बड़ी मुश्किल से जान बची थी। उस गंभीर चेतावनी के बाद भी न तो माफिया ने गतिविधियां बंद कीं और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की। नदी के बीचों-बीच चल रहा यह जानलेवा खेल कभी भी किसी बड़ी जनहानि में बदल सकता है।
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खनिज विभाग की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर सवाल
क्षेत्र में दिन-रात दौड़ते ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों का शोर हर किसी को सुनाई दे रहा है, सिवाय खनिज विभाग के। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण या मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर मशीनों का उपयोग संभव नहीं है। अब देखना यह है कि यह खबर सामने आने के बाद विभाग अपनी “कुंभकर्णी नींद” से जागता है या फिर रेत माफिया इसी तरह बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों की लूट जारी रखेंगे।
