संघर्ष से शिखर तक: सागर में क्रिकेटर क्रांति गौंड़ ने सुनाई प्रेरक कहानी, छात्राओं को दिया बड़ा संदेश
Kranti Gond Story: सागर के बंडा में क्रिकेटर क्रांति गौंड ने सुनाई अपने संघर्ष की कहानी, बोलीं- 'रणजी खेलने के लिए मां ने बेच दिए थे गहने', एसडीओपी ने दिलाया नशा मुक्ति का संकल्प।
- Reported By: सरजू पटेल | Edited By: सजल रघुवंशी
क्रांति गौड़ (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kranti Gond Inspirational Story: सागर जिले के बंडा में आयोजित महिला सशक्तिकरण एवं नशा मुक्ति संकल्प समारोह उस समय प्रेरणा का केंद्र बन गया, जब अंतरराष्ट्रीय भारतीय महिला क्रिकेटर क्रांति गौंड़ ने अपने संघर्ष की कहानी सुनाकर छात्राओं और युवाओं में नया उत्साह भर दिया। कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अनुविभाग बंडा द्वारा शासकीय सांदीपनि स्कूल में किया गया, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर क्रांति गौंड़ का सम्मान किया गया। विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।
क्रांति गौड़ ने सुनाई अपने संघर्ष की कहानी
अपने संबोधन में क्रांति गौड़ ने बताया कि लिधौरा जैसे छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके परिवार और गांव के लोगों का सहयोग हमेशा उनके साथ रहा। उनके पिता पुलिस विभाग में थे, लेकिन नौकरी चले जाने के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। ऐसे समय में क्रिकेट का सपना पूरा करना बेहद मुश्किल था।
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रणजी ट्रॉफी के लिए क्रांति की मां ने बेचे थे गहने
क्रांति ने भावुक होते हुए बताया कि रणजी ट्रॉफी खेलने जाने के लिए उनकी मां ने अपने गहने तक बेच दिए, ताकि बेटी का सपना अधूरा न रह जाए। उन्होंने कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें परिवार के त्याग और सही मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है।
‘महेनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं’
क्रांति गौड़ छात्राओं से कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने खुशी जताई कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता के बाद अब अभिभावक भी अपनी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि आने वाले समय में गांवों की बेटियां उनसे भी आगे बढ़कर देश का नाम रोशन करें।
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कार्यक्रम के अंत में एसडीओपी प्रदीप बाल्मीकि ने सभी उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया और युवाओं से खेल, शिक्षा और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की अपील की। कार्यक्रम ने महिला सशक्तिकरण, खेल और सामाजिक जागरूकता का मजबूत संदेश दिया।
