एनेस्थीसिया ओवरडोज के आरोप के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मांगी जांच रिपोर्ट; सागर BMC में इलाज बनी मौत की वजह?
Anesthesia Overdose Death Case: सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में एनेस्थीसिया ओवरडोज से मरीज देवेंद्र पाठक की मौत, स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर स्टाफ नर्स निलंबित।
- Reported By: सरजू पटेल | Edited By: सजल रघुवंशी
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sagar BMC Anesthesia Overdose Allegations: सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज यानी बीएमसी से सामने आई एक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली कटघरे में है।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि मरीज को एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दिए जाने से उसकी हालत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इसका संज्ञान लिया है।
बुंदेलखंड मेडिलकल कॉलेज में चल रहा था मृतक का इलाज
जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक देवेंद्र का उपचार बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। इलाज के दौरान उन्हें एनेस्थीसिया से जुड़ी दवा दी गई, लेकिन आरोप है कि दवा की मात्रा अधिक होने के कारण उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
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समय पर नहीं मिला उचित उपचार- मृतक के परिजन
परिवार का दावा है कि मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया और उचित उपचार नहीं मिल सका, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद परिजनों में भारी नाराजगी देखी गई।
अस्पताल प्रबंधन पर लगे गंभीर आरोप
मृतक देवेंद्र पाठक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि मरीज को हाई-रिस्क दवा दी गई थी, तो उसके लिए निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल और विशेषज्ञ निगरानी का पालन क्यों नहीं किया गया।
स्वास्थय मंत्री ने तुरंत लिया मामले में संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जांच के आदेश देते हुए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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जानकारी यह भी सामने आई है कि मामले में संबंधित नर्स को निलंबित किए जाने की कार्रवाई की गई है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है।
