Rewa Kasai Village Road Problem : रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र का कसई गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए जूझ रहा है। ग्राम पंचायत पतौता के अंतर्गत आने वाले इस गांव में बारिश के दिनों में मुख्य मार्ग तक पहुंचने वाला करीब तीन किलोमीटर का रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। हालात इतने खराब हैं कि एंबुलेंस तक गांव में नहीं पहुंच पाती। ऐसे में ग्रामीणों को इलाज के लिए मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसी बदहाल रास्ते के कारण कसई गांव निवासी 65 वर्षीय मोहम्मद सिरदार को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। बताया जा रहा है कि तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन बारिश के कारण रास्ता दलदल में बदल चुका था। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। समय पर उपचार नहीं मिलने से बुजुर्ग की मौत हो गई।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में गांव की स्थिति बेहद खराब हो जाती है। मुख्य सड़क से गांव तक पहुंचने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा रास्ता कीचड़ से भर जाता है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। कई बार ग्रामीणों को मरीजों को पैदल या अन्य साधनों से मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है।
कसई गांव में सड़क की बदहाली का दर्द सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की मौत होने पर शव को भी कंधों पर उठाकर दलदल भरे रास्ते से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। बारिश के दौरान कीचड़ से भरे रास्ते पर शव लेकर चलने की मजबूरी ग्रामीणों की बेबसी को उजागर करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का सवाल है कि जब आपात स्थिति में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती, तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज कैसे मिलेगा? बारिश के मौसम में यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
कसई गांव की यह घटना सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करती है। सड़क के अभाव में बारिश के दिनों में गांव का संपर्क लगभग कट जाता है और एक खराब रास्ता जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बन जाता है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेकर सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।