

Rewa Freedom Fighter Jawahar Singh : रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम डोरी-भितरी में 15 अगस्त का दिन देशभक्ति और गम के मिले-जुले माहौल का गवाह बना। एक ओर देशभर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर गांव से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जवाहर सिंह की अंतिम यात्रा निकली। 15 अगस्त 2026 को उनका निधन हो गया। जिस आजादी के लिए उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की जेल में सजा काटी थी, उसी आजादी के पर्व पर उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
जवाहर सिंह का जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों से जुड़ा रहा। उन्होंने वर्ष 1932 के राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी। आंदोलन में शामिल होने के कारण उन्हें छह महीने के कारावास की सजा भुगतनी पड़ी थी। इसके साथ ही अंग्रेजी हुकूमत ने उन पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। उन्होंने नमक आंदोलन में भी भाग लिया और वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता मिलने के बाद भी जवाहर सिंह का जीवन देश और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समर्पित रहा। वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े मूल्यों और विचारों को जीवनभर आगे बढ़ाते रहे। परिजनों के अनुसार उन्होंने अपने बच्चों और पोतों को भी स्वतंत्रता संग्राम की विरासत, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़े रखा।
जवाहर सिंह के विचार उनके जीवन के अंतिम दौर तक देशहित से जुड़े रहे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में शासन से मिलने वाली सम्मान निधि को लेकर उन्होंने शुरुआत में इसे लेने से इनकार कर दिया था। उनका मानना था कि शासन की राशि जनहित, देशहित और समाज के काम आनी चाहिए। बाद में उन्होंने इस उम्मीद के साथ सम्मान निधि स्वीकार की कि उनके परिवार को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रूप में सम्मान और पहचान मिलती रहे।
जवाहर सिंह के तीन पुत्र कमल नारायण सिंह, कमलाकर सिंह और प्रभाकर सिंह हैं। परिजनों के मुताबिक उन्होंने अपने पुत्रों और पोतों को हमेशा स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों और देशभक्ति के मूल्यों की जानकारी दी। उनका प्रयास रहा कि आने वाली पीढ़ियां आजादी के लिए किए गए संघर्ष को भूलें नहीं और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
अंतिम संस्कार के दौरान सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, पूर्व राज्यसभा सांसद राजमणि सिंह पटेल, युवराज घनश्याम सिंह बसरेही, संचार निर्माण समिति अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय, जवा तहसीलदार राजेश शुक्ला और अतरैला थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पुलिस जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को अंतिम सलामी दी। उनके बड़े पुत्र कमल नारायण सिंह ने मुखाग्नि दी।
जवाहर सिंह की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और अंतिम संस्कार में सप्त लकड़ी अर्पित की। पूरे गांव में शोक के साथ देशभक्ति का भाव भी नजर आया। अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया।
स्वतंत्रता दिवस पर जब देशभर में तिरंगा लहरा रहा था, राष्ट्रगान गूंज रहा था और आजादी का जश्न मनाया जा रहा था, उसी दिन डोरी-भितरी में उस सेनानी की अंतिम यात्रा निकली, जिसने इसी आजादी के लिए अंग्रेजों की जेल में सजा भुगती थी। जवाहर सिंह की विदाई सिर्फ एक व्यक्ति की अंतिम यात्रा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की उस पीढ़ी को अंतिम सलाम थी, जिसने देश के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगाया। उनके निधन के साथ स्वतंत्रता संग्राम की एक जीवंत कड़ी भले ही टूट गई, लेकिन उनका संघर्ष और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।