

Rewa Alaxim-40 Injection Case : रीवा में सरकारी सप्लाई की दवा के निजी अस्पताल में इस्तेमाल के दावे ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाणसागर कॉलोनी, पीटीएस रोड स्थित आयुष्मान अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती एक मरीज के इलाज के दौरान Alaxim-40 इंजेक्शन की शीशी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि इंजेक्शन की पैकेजिंग पर ‘Not For Sale’ और ‘Government Supply’ लिखा हुआ है। मामले को लेकर कांग्रेस ने जांच की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक करीब 78 वर्षीय मरीज रणवीर सिंह का आयुष्मान अस्पताल के ICU में इलाज चल रहा था। इसी दौरान उपचार में इस्तेमाल किए जा रहे Alaxim-40 इंजेक्शन की तस्वीर सामने आई। दावा है कि इंजेक्शन की शीशी पर बिक्री के लिए नहीं होने और सरकारी सप्लाई से संबंधित जानकारी अंकित है। इंजेक्शन की कीमत करीब 56 हजार रुपये बताई जा रही है। हालांकि इसकी वास्तविक कीमत, सप्लाई का स्रोत और अस्पताल तक पहुंचने की प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन सभी पहलुओं की जानकारी जांच और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में मुख्य सवाल यह है कि यदि इंजेक्शन वास्तव में सरकारी सप्लाई का है तो वह निजी अस्पताल तक किस माध्यम से पहुंचा। क्या अस्पताल को यह दवा किसी अधिकृत प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई गई या फिर सरकारी स्टॉक से बाहर निकली? इसका जवाब संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा। जांच के दौरान इंजेक्शन के बैच नंबर, स्टॉक रजिस्टर, सप्लाई रिकॉर्ड और अस्पताल में दवा की खरीद या प्राप्ति से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन रिकॉर्ड से दवा के स्रोत और उसकी सप्लाई चेन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मामले को लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी सप्लाई की दवा निजी अस्पताल में पहुंची है तो मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। विनोद शर्मा ने पूरे प्रकरण की CBI जांच की मांग की है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला पर भी निशाना साधते हुए सरकार से इस मामले में जवाब मांगा। कांग्रेस का कहना है कि सरकारी संसाधनों और मरीजों के हित से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।
मामले को लेकर रीवा CMHO ने जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि जांच में तथ्य सामने आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि Alaxim-40 इंजेक्शन किस स्रोत से आया, किस माध्यम से निजी अस्पताल तक पहुंचा और मरीज के उपचार में इसके इस्तेमाल की परिस्थितियां क्या थीं। फिलहाल सरकारी सप्लाई की दवा होने और उसकी कीमत से जुड़े दावों की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही हो सकेगी।