ग्वालियर कांड पर सियासी बवाल (फोटो- सोशल मीडिया)
MP Ambedkar Photo Burning Controversy: मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर इस समय सियासी और सामाजिक गुस्से का केंद्र बन गया है। बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर जलाने की घटना ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। जहां एक तरफ भीम आर्मी जैसे संगठन सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अब हिंदू धर्म गुरुओं ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। काली सेना के संस्थापक स्वामी आनंद स्वरूप ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उन्हें लगा था ये हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, लेकिन ये तो अंबेडकर राष्ट्र बनाने में जुट गए हैं।
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा को फिलहाल अदालत से राहत नहीं मिली है और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टल गई है। उधर, पुलिस की कार्रवाई से सवर्ण समाज में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका मानना है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। लोगों का कहना है कि यह तस्वीर जलाने की घटना दरअसल क्रिया की प्रतिक्रिया है। अगर मनुस्मृति जलाने वालों पर समय रहते एक्शन लिया गया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती। अब यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि एक बड़ी वैचारिक लड़ाई बन चुका है।
ग्वालियर की घटना ने एक बार फिर बता दिया कि राष्ट्र और सनातन के लिए संघर्ष आसान नहीं होता। इतिहास गवाह है—जेल जाना अपराध नहीं, बल्कि विचारों की परीक्षा होती है। जो सनातन में आस्था रखते हैं, वे अपमान नहीं, सत्य और धैर्य के मार्ग पर चलते हैं। आज आवश्यकता है वैचारिक जागरूकता की, न कि… pic.twitter.com/haBLWfU1Mj — Swami Anand Swaroop (@kalisenachief) January 3, 2026
स्वामी आनंद स्वरूप ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा अब एकात्म मानववाद छोड़कर अंबेडकरवाद की राह पर है और उसे अब हिंदुत्व को परिष्कृत करना होगा, वरना ये मंदिरों में नमाज पढ़वा देंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि तुमने जिस तरह एकतरफा कार्रवाई की है, सवर्ण समाज इस अपमान को नहीं भूलेगा और तुम्हें खून के आंसू रुलाएगा। उन्होंने अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जेल जाना अपराध नहीं, बल्कि विचारों की परीक्षा होती है। उनके अनुसार, भाजपा का कथित हिंदू विरोधी चेहरा अब सबके सामने आ गया है।
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विवाद के दूसरे पक्ष की बात करें तो आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने ग्वालियर की घटना में शामिल आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए लगाने की अपील की है। आजाद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए और मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे बाबा साहब के करोड़ों अनुयायियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचेगी और देश में सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा होगा।