MP हाईकोर्ट का सख्त रुख, अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई तेज हो; दो हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने के आदेश
MP High Court: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने नियमों की धज्जियां उड़ाकर अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों की रिपोर्ट को दो हफ्ते में पेश करने को कहा है। कोर्ट में इस मामले की याचिका कोरोनाकाल के समय 2022 में दायर की गई थी।
- Written By: सौरभ शर्मा
मध्यप्रदेश हाइकोर्ट जबलपुर
भोपाल: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नियम विरुद्ध संचालित अस्पतालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि शहर में चल रहे अनियमित अस्पतालों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर पेश की जाए। यह मामला 2022 के जबलपुर न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड से जुड़ा है, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी। मामले में याचिका लॉ स्टुडेंट एसोसिशन के अध्यक्ष के द्वारा दायर की गई थी, जिसमें अस्पतालों के नियमों में उल्लंघन और लापरवाही वरतने की बातें सामने आईं थी।
इस घटना के बाद अदालत ने निजी अस्पतालों में नियमों के उल्लंघन और लापरवाही को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान बताया गया कि कोठारी और एप्पल अस्पताल का पंजीयन रद्द कर दिया गया है और अन्य अस्पतालों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
निजी अस्पतालों के संचालन पर हाईकोर्ट सख्त
यह याचिका लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने 2022 में दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि कोरोना काल में कई अस्पतालों को नियमों की अनदेखी कर लाइसेंस दिए गए। याचिका में कहा गया कि अस्पतालों को बिना फायर सिक्योरिटी, बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और दमकल वाहन के लिए पर्याप्त स्थान के लाइसेंस जारी किए गए, जिससे लोगों की जान को खतरा हुआ।
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अग्निकांड की जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंपने के आदेश
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि न्यू लाइफ अस्पताल को लाइसेंस देने वाले अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच कमेटी ने इन्हें दोषी ठहराया था, लेकिन पुलिस ने अब तक आरोपियों को नहीं जोड़ा। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट तुरंत पुलिस को सौंपी जाए ताकि दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी उचित कानूनी कार्रवाई हो सके।
2022 में दायर हुई थी याचिका
इस जनहित याचिका को लॉ स्टूडेंट के द्वारा वर्ष 2022 में दायर किया गया था, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि कोरोनाकाल के दौरान बड़ी संख्या में अस्पतालों को नियमों की अनदेखी कर धडल्ले से लाइसेंस दिए गए। याचिका में कहा है कि नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी नियम, बिल्डिंग कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, व पार्किंग स्पेस और दमकल वाहन के लिए 6 मीटर खुली जगह की सीधे तौर पर अनदेखी की गई और अस्पतालों को अनुमति दे दी गई थी।
