

Priest Refuses Rescue Operation Morena: मुरैना में बारिश का दौर थमने के बाद नदियों का उफान धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन जिले के कई ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है।
कई गांवों के रपटे और पुलिया अब भी पानी में डूबे हुए हैं। इन पर चार से पांच फीट तक पानी बह रहा है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन ठप है। वहीं, नदी किनारे की बस्तियों और खेतों में भी पानी भरा हुआ है।
क्वारी नदी का जलस्तर रविवार को 167.88 मीटर था, जो सोमवार शाम तक 165 मीटर से नीचे आ गया। वहीं चंबल नदी का जलस्तर भी 130 मीटर से घटकर 127.4 मीटर पर पहुंच गया। आसन, सांक, सोन और कुरई समेत अन्य बरसाती नदियों का पानी भी या तो स्थिर है या धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके बावजूद बागचीनी, खिटौरा, घुरैया बसई, पलपुरा, छोटी कोंथर, लेपा-भिड़ोसा और पचोखरा समेत कई गांवों के रपटे-पुलिया अभी भी डूबे हुए हैं।
बाढ़ के बीच सिविल लाइन थाना क्षेत्र की डोमपुरा ग्राम पंचायत के डाबरीपुरा स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में पुजारी नरसिंह दास तीन दिन से अकेले रह रहे हैं। आसन नदी में उफान के कारण मंदिर चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू बन गया है। सोमवार को आपदा प्रबंधन की टीम पुजारी को रेस्क्यू करने पहुंची, लेकिन उन्होंने मंदिर छोड़कर जाने से साफ इनकार कर दिया। पुजारी का कहना था कि मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है और वह उसे व मंदिर को सूना छोड़कर नहीं जाएंगे। काफी समझाइश के बाद भी पुजारी नहीं माने तो रेस्क्यू टीम वापस लौट गई। बाद में टीम खाद्य सामग्री और जरूरत का सामान लेकर मंदिर पहुंची। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले साल भी बाढ़ के दौरान यह मंदिर टापू बन गया था और तब पुजारी को काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया गया था।
माता बसैया थाना क्षेत्र के मनफूल का पुरा में भी करीब 14 से अधिक ग्रामीण पानी के बीच फंस गए थे। एसडीईआरएफ की टीम उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान बताते हुए वहां से जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद टीम ने ग्रामीणों को भोजन और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई और वापस लौट गई।
एसडीईआरएफ प्रभारी प्रमोद डंडौतिया के अनुसार पिछले तीन दिनों में टीम ने करीब 70 लोगों को रेस्क्यू किया है। जौरा क्षेत्र के चिलर से 12 और देवगढ़ क्षेत्र से 41 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। कुछ अलग अलग अन्य जगहों से भी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है
इधर, जिले के सबसे बड़े पगारा डैम के सभी सात गेट सोमवार को तीसरे दिन भी खुले रहे। कैचमेंट एरिया से लगातार पानी आने के कारण बांध क्षमता से अधिक भरा हुआ है। सातों गेट से करीब 4609 क्यूसेक पानी आसन नदी में छोड़ा जा रहा है। वही कोतवाल डैम के 15 में से 12 गेट रविवार शाम खोले गए थे। जलस्तर कम होने के बाद पांच गेट बंद कर दिए गए। सोमवार को सात गेट खुले रहे और करीब 12 हजार क्यूसेक पानी आसन नदी में छोड़ा गया। वहीं पिलुआ डैम के 21 में से सात गेट रविवार दोपहर से देर रात तक खुले रहे, जिन्हें सोमवार सुबह बंद कर दिया गया।
मुरैना आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. हरवेंद्र सिंह के मुताबिक फिलहाल आसमान साफ है, लेकिन बारिश की संभावना बनी हुई है। अगले दो दिनों में जिले में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एसपी धर्मराज मीना ने सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ प्रभावित इलाकों की निगरानी करने तथा जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को तत्काल मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जलभराव की स्थिति को देखते हुए सोमवार को स्कूल और आंगनबाड़ियों में छुट्टी रही। कलेक्टर ने समयसीमा प्रकरणों की बैठक भी स्थगित कर सरकारी अमले को मैदानी क्षेत्रों में निगरानी के लिए तैनात किया है।