

Kailaras Sugar Factory Protest : मुरैना के कैलारस के बंद पड़े शक्कर कारखाने को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर कांग्रेस के जौरा विधायक पंकज उपाध्याय का आमरण अनशन जारी है। स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद विधायक ने दोपहर 11 बजे कारखाना परिसर में आमरण अनशन शुरू किया था। उनके साथ शक्कर कारखाना चालू कराओ संघर्ष समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में किसान भी आंदोलन में शामिल हैं।
शक्कर कारखाना चालू कराओ संघर्ष समिति के बैनर तले कारखाना परिसर में आंदोलन चल रहा है। यहां टेंट लगाया गया है, जिसमें विधायक के साथ किसान और संघर्ष समिति के सदस्य लगातार मौजूद हैं। रविवार को अनशन के दूसरे दिन भी पंकज उपाध्याय धरने पर बैठे रहे। आंदोलनकारियों का कहना है कि बंद पड़े कारखाने को दोबारा शुरू करना क्षेत्र के किसानों और स्थानीय लोगों के हित में जरूरी है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग कैलारस शक्कर कारखाने को दोबारा शुरू करना और इसे एमएसएमई को हस्तांतरित करने की कार्रवाई को रद्द करना है। अनशन स्थल पर आमसभा का आयोजन भी किया गया। इसमें पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा, किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तिवारी, माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह, सांसद अशोक सिंह, मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर, अंबाह विधायक देवेंद्र सखबार और पूर्व विधायक बैजनाथ कुशवाह समेत कई किसान और राजनीतिक दलों के नेताओं ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।
विधायक के आमरण अनशन की जानकारी के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ। रविवार रात करीब 11 बजे सबलगढ़ एसडीएम मेघा तिवारी अनशन स्थल पर पहुंचीं और विधायक से चर्चा की। एसडीएम ने विधायक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। हालांकि विधायक ने सरकार से लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया।
जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा कि जब तक मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अथवा मुख्यमंत्री की ओर से शक्कर कारखाना चालू कराने का लिखित आदेश उनके हाथ में नहीं आता, तब तक वह अनशन स्थल से नहीं उठेंगे। उन्होंने कहा कि उनका आमरण अनशन गांधीवादी तरीके से जारी रहेगा। विधायक के इस रुख के बाद आंदोलन आगे भी जारी रहने की स्थिति बनी हुई है।
कैलारस शक्कर कारखाने को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में किसानों के साथ कई राजनीतिक और किसान संगठनों के नेता भी समर्थन दे रहे हैं। आमरण अनशन के दूसरे दिन भी कारखाना परिसर में लोगों की मौजूदगी बनी रही। अब सभी की नजर सरकार की ओर से इस मांग पर लिए जाने वाले फैसले और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।