

Kailaras Sugar Factory Protest : मुरैना जिले के कैलारस सहकारी शक्कर कारखाने को बंद करने और उसकी संपत्तियों के हस्तांतरण के विरोध में किसानों और संघर्ष समिति ने कारखाना परिसर में बड़ा धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि शक्कर कारखाना बचाने के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। धरना के बाद मुख्यमंत्री के नाम तीन सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया।
जानकारी के अनुसार कैलारस स्थित शक्कर कारखाना परिसर में ‘शक्कर कारखाना बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले किसानों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि शक्कर कारखाने को बंद करने और उसकी संपत्तियों के हस्तांतरण का निर्णय वापस लिया जाए।
धरना सभा को संबोधित करते हुए जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने शक्कर कारखाना चलाने की घोषणा की थी, लेकिन सहकारिता विभाग ने उसे सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम विभाग को सौंप दिया। उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना एक वर्ष में छह बार यह कह चुके हैं कि कारखाना चालू होगा और किसानों से गन्ना उत्पादन शुरू करने को कहा गया, जिसके बाद किसानों ने गन्ना उगाना शुरू कर दिया। इसके बावजूद 29 जून को कारखाने को स्थाई रूप से बंद कर दिया गया।
विधायक ने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा को पूरा नहीं होने दिया जाएगा और कारखाना बिकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब कैलारस ही नहीं, जिला स्तर पर धरना दिया जाएगा और सरकार के किसी भी मंत्री, सांसद या मुख्यमंत्री के आगमन पर काले झंडे दिखाकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा परिसर में भी धरना दिया जाएगा और यदि गोली खानी पड़े तो गोली खाएंगे, जेल जाना पड़े तो जेल भी जाएंगे, लेकिन शक्कर कारखाना बिकने नहीं देंगे।
धरना सभा में पूर्व विधायक महेशदत्त मिश्रा और किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी सहित कई नेताओं ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कारखाने के पंजीयन को रद्द कर उसकी जमीन दूसरे विभाग को सौंपने की कार्रवाई किसानों और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।
धरना समाप्त होने के बाद संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम तहसीलदार को तीन सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इसमें शक्कर कारखाने को एमएसएमई विभाग को हस्तांतरित करने की कार्रवाई निरस्त करने, कारखाने की फार्म हाउस की जमीन वापस प्रबंधन को सौंपने और गन्ना किसानों व कर्मचारियों के बकाया भुगतान के साथ गन्ना उत्पादन पर घोषित अनुदान को लागू करने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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