खतरे में MP की मोहन सरकार, अब सिंधिया बनेंगे CM? मुरैना की इस घटना से राज्य में सियासी भूचाल
Madhya Pradesh की राजनीति में इन दिनों चर्चाओं का बाजार चरम पर है। मुरैना में लगे एक धमाकेदार बैनर ने राज्य में हलचल मचा दी है, पोस्टर में सिंधिया को MP का CM बनाने की मांग धमकी भरे लहजे में की गई है।
- Written By: सौरभ शर्मा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (फोटो- सोशल मीडिया)
Jyotiraditya Scindia CM Poster: मध्य प्रदेश के मुरैना में लगे एक पोस्टर ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। इस धमाकेदार बैनर पर साफ-साफ लिखा है, “श्रीमंत महाराज साहब ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को मुख्यमंत्री बनाओ, नहीं तो अपनी खैर बचाओ।” इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह वास्तव में सिंधिया समर्थकों का आक्रोश है या सच में वास्तविक जनता की आवाज है, या फिर इसके पीछे कांग्रेस की कोई सोची-समझी रणनीति काम कर रही है? यह मामला अब भोपाल से लेकर दिल्ली तक चर्चा का विषय बन गया है।
यह पूरा घटनाक्रम 13 सितंबर के बाद सामने आया, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुरैना के दौरे पर थे। उन्होंने इस दौरान क्षेत्र को दो बड़ी सौगातें दीं, जिसमें मुरैना में नई एयरपोर्ट सुविधाओं का ऐलान और किसानों के लिए 500 करोड़ की सब्सिडी योजना का विस्तार शामिल है। इन घोषणाओं के ठीक बाद इस तरह के बैनर का लगना कई राजनीतिक इशारे कर रहा है। प्रशासन से लेकर राजनीतिक दल तक इस घटनाक्रम पर अपनी नजर गढ़ाए हुए हैं और इसके पीछे की असली वजह तलाशने में जुटे हुए हैं।
धमकी या जनता की मांग?
बैनर में इस्तेमाल की गई भाषा, खासकर “अपनी खैर बचाओ” वाली पंक्ति ने राज्य की राजनीति में हलचल तो जरूर तेज कर दी है। कांग्रेस इसे सिंधिया खेमे की दबाव की राजनीति और जनता को भड़काने की कोशिश बता रही है। वहीं, संत समाज सेवा समिति जैसे संगठन और बीजेपी समर्थक इसे केवल जनभावना की अभिव्यक्ति बता रहे हैं, न कि कोई धमकी। समिति के अध्यक्ष भगवान दास त्यागी ने खुलकर कहा कि सिंधिया जी ने हमेशा समाज के लिए काम किया है और अब समय आ गया है कि प्रदेश की कमान उनके हाथों में सौंपी जाए।
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क्या मोहन सरकार को है खतरा?
अब इस पूरे मामले के दो पहलू सामने आ रहे हैं। पहला, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बीजेपी में अंदरूनी कलह पैदा करने के लिए कांग्रेस की एक चाल हो सकती है, ताकि सरकार को अस्थिर किया जा सके। दूसरा पहलू यह है कि यह सिंधिया समर्थकों की वास्तविक भावना हो सकती है। समर्थकों का तर्क है कि 2020 में सरकार बनाने से लेकर केंद्र में मंत्री पद तक, सिंधिया ने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। वजह चाहे जो भी हो, यह साफ है कि मोहन सरकार इस राजनीतिक घटनाक्रम को हल्के में नहीं ले सकती, क्योंकि अगर यह सच में जनता का मूड है, तो यह आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
