मंडला में 108 की देरी या सिस्टम की लापरवाही; चार नवजातों की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल
Newborn Death In Mandla: मंडला के बिछिया में 108 एंबुलेंस न मिलने पर ऑटो में हुआ प्रसव, 4 नवजातों की रास्ते में मौत, प्रशासन ने दिए जांच के कड़े विलेख, लापरवाही पर होगी कार्रवाई।
- Reported By: दीपक ताम्रकार | Edited By: सजल रघुवंशी
मंडला में 108 एंबुलेंस की लापरवाही (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mandla 108 Ambulance Negligence: मंडला जिले के बिछिया विकासखंड से सामने आई यह घटना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्राम नयागांव की एक गर्भवती महिला ने रास्ते में एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन समय से पहले प्रसव होने के कारण चारों नवजातों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि 108 एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती, तो शायद इन मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।
जानकारी के अनुसार, नयागांव निवासी 28 वर्षीय गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन उनका आरोप है कि काफी देर तक एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई और समय निकलता चला गया।
महिला ने रास्ते में ही दिया चार बच्चों को जन्म
जब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा, तो परिजन महिला को ऑटो-रिक्शा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछिया लेकर रवाना हुए। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दे दिया। समयपूर्व प्रसव और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा समय पर नहीं मिलने के कारण चारों नवजातों की मौत हो गई।
सम्बंधित ख़बरें
मुरैना में हाईवे पर लूट करने वाले चार शातिर लुटेरों को पुलिस ने दबोचा; पांच लाख रुपये कीमत के जेवर किए बरामद
जबलपुर के बड़ा फुहारा में अचानक ढही 3 मंजिला इमारत, बंद था बाजार; हो सकता था बड़ा हादसा
मुरैना में महापौर के पुराने घर की गली बदहाल, 4 साल से सड़क-नाली को तरस रहे लोग; लोगों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
सीहोर में लुटेरी दुल्हन का आतंक: शादी के 3 दिन बाद गहने और 2 लाख लेकर फरार, न्याय के लिए भटक रहा परिवार
आशा कार्यकर्ताओं ने महिला को पहुंचाया स्वास्थय केंद्र
घटना की सूचना मिलते ही गांव की आशा कार्यकर्ता सक्रिय हुईं और महिला को तत्काल बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल महिला की हालत स्थिर है और उसका इलाज जारी है।
घटना ने खड़े किए गंभीर सवाल
हालांकि, इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और गर्भवती महिलाओं को समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन यदि परिजनों के आरोप सही हैं, तो आखिर एक प्रसूता को ऑटो-रिक्शा में अस्पताल जाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा? क्या एंबुलेंस सेवा में तकनीकी खामी थी, मानवीय लापरवाही थी या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की कोई बड़ी विफलता?
यह भी पढ़ें: मुरैना में हाईवे पर लूट करने वाले चार शातिर लुटेरों को पुलिस ने दबोचा; पांच लाख रुपये कीमत के जेवर किए बरामद
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चार मासूमों की मौत की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी जांच और फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा?
